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मुजफ्फरनगर से गुजरा था हिंदी गजल का ‘कारवां’

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हिंदी दिवस...डीएवी इंटर कॉलेज का पुराना भवन, जहां पर कभी अध्ययन करते थे दुष्यंत त्यागी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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गिरिराज सिंह
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मुजफ्फरनगर। विष्णु प्रभाकर, गिरिराज किशोर जैसे साहित्य श्लाकाओं और कवियों के कवि शमशेर बहादुर सिंह की लेखनी ने मुजफ्फरनगर को साहित्य के क्षितिज में ध्रुव की चमक दी, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी गजल का ‘कारवां’ भी मुजफ्फरनगर से होकर गुजरा था। प्रख्यात हिंदी गजलकार दुष्यंत त्यागी ने अपने जीवन के दो साल यहीं गुजारे।
बिजनौर जिले के गांव राजपुर नवादा में जन्मे दुष्यंत त्यागी की इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज), दिल्ली और भोपाल तक की जीवन यात्रा में मुजफ्फरनगर भी एक पड़ाव रहा। 1943 से 1945 तक वे यहां रहे। उस समय यह क्षेत्र यूनाइटेड प्रोविंसेज आगरा और अवध के अंतर्गत आता था। नगर का डीएवी इंटर कॉलेज तब डीएवी हाईस्कूल हुआ करता था। यहीं से उन्होंने छठी और सातवीं कक्षा उत्तीर्ण की। कॉलेज के एसआर रजिस्टर में उनके दोनों वर्षों का विवरण दर्ज है। कक्षा छह का शैक्षिक सत्र 10 सितंबर 1943 से 13 मई 1944 तक और सातवीं का आठ जुलाई 1944 से 14 मई 1945 तक रहा था। डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवकुमार यादव बताते हैं कि दुष्यंत त्यागी ने यहां से ही छठी और सातवीं कक्षा पास की थी। इसका रिकार्ड कॉलेज में उपलब्ध है। वह पूरा नाम दुष्यंत नारायण सिंह त्यागी लिखते थे। बिजनौर से वह यहां किन परिस्थितियों में आए और कहां रहे थे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
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पुश्तैनी घर पर मिली नोटबुक से लगा पता
फोटो
मुजफ्फरनगर। आकाशवाणी की निदेशक मंदीप कौर दिसंबर 2018 में दुष्यंत त्यागी के गांव राजपुर नवादा गईं थीं। उनके खंडहर हो चुके पुश्तैनी घर पर मौजूद सामान में उन्हें एक नोटबुक मिली। इस पर दुष्यंत नारायण सिंह त्यागी का नाम लिखा था तथा स्कूल का नाम डीएवी हाईस्कूल मुजफ्फरनगर दर्ज था। साहित्यकार एवं डीएवी डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष आरएम तिवारी बताते हैं कि मंदीप कौर ने इस नोटबुक का फोटो उन्हें भेजा। इस फोटो के आधार पर उन्होंने डीएवी इंटर कॉलेज का रिकार्ड तलाश कराया तो पता लगा कि दुष्यंत त्यागी ने 1943 से 1945 तक यहां पढ़ाई की थी। वह बताते हैं कि यह हो सकता है कि दुष्यंत त्यागी का कोई रिश्तेदार यहां रहता हो, जिसके पास रहकर उन्होंने यहां पढ़ाई की या वह स्कूल के हॉस्टल में रहे हों। यह डीएवी कॉलेज के लिए गौरव की बात है कि हिंदी साहित्य के पुरोधा ने यहां से शिक्षा ली। वह चाहते हैं कि उनकी स्मृति में कॉलेज में कोई कार्यक्रम हो अथवा ऐसी कोई निशानी लगे कि छात्र भी इस बात से अवगत हो सकें।
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दुष्यंत त्यागी एक परिचय...
मुजफ्फरनगर। बिजनौर के गांव राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 को जन्मे दुष्यंत कुमार त्यागी प्रारंभिक शिक्षा के बाद डिग्री की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद (अब प्रयागराज) चले गए थे। वहां इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमए किया। वहां पर कमलेश्वर और मार्कंडेय की मित्रता के साथ उनका साहित्य परवान चढ़ता गया। आकाशवाणी की नौकरी के कारण दिल्ली और फिर भोपाल में रहे। उनका गजल संग्रह ‘साये में धूप’ हिंदी साहित्य का अनमोल खजाना है। उनकी लिखी ‘हो चुकी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए’ तथा ‘कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’ इतनी प्रसिद्ध पंक्तियां हैं कि हर किसी की जुबान पर रहती हैं। आपातकाल में भी दुष्यंत त्यागी ने सत्ता के खिलाफ खूब लेखनी चलाई। 1975 में मात्र 42 साल की उम्र में हिंदी गजल के इस पुरोधा का निधन हो गया।

दिं दिवस...साहित्यकार आरएम तिवारी।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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