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जिला चिकित्सालय में दो घंटे बंद रखी ओपीडी

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स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से मरीजों पर मुसीबत की मार
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मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य महासंघ द्वारा कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति के विरोध में स्वास्थ्यकर्मियों ने शनिवार सुबह आठ बजे से दस बजे तक इमरजेंसी सेवा को छोड़ कर ओपीडी सहित सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी। इस दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्यकर्मियों ने सीएमएस कार्यालय के समक्ष धरना, प्रदर्शन किया। दस बजे बाद पर्ची बना कर ओपीडी प्रारंभ हुई।
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जिला चिकित्सालय के स्वास्थ्यकर्मियों ने शनिवार सुबह आठ बजे से लेकर दस बजे तक सीएमएस कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य कर्मियों के धरने के कारण इमरजेंसी सेवा को छोड़कर दो घंटे तक ओपीडी सहित तमाम स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी। धरने को संबोधित करतेे हुए संजीव कुमार लांबा ने कहा कि कोविड-19 काल में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारियों की मृत्यु हुई है। कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है तथा जबरन तबादला किया जा रहा है। अन्य प्रदेशों के स्वास्थ्यकर्मियों को एक-एक महीने का वेतन दिया गया, परंतु यहां पर अभी तक मूल वेतन के 25 प्रतिशत प्रोत्साहन धनराशि का भी भुगतान नहीं किया गया है। स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पड़े पदों को भरना चाहिए। कोरोना संक्रमण अभी जारी है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों का अन्य जिले में तबादला नहीं होना चाहिए। धरने में डॉ. योगेंद्र त्रिखा केसी राय, कमल, ब्रजेश, प्रमोद, वंदना, नीतू, डॉ संजीव गुप्ता, डॉ आहूजा, संजय जोधा, संदीप रंजन समेत स्वास्थ्य विभाग की समस्त एसोसिएशन सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं अन्य संगठनों के कर्मचारी व अधिकारी मौजूद रहे। धरने के दौरान घोषणा की गई कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा 12 जुलाई को लखनऊ महानिदेशालय का घेराव किया जाएगा। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थानांतरण नीति निरस्त नहीं की तो समस्त स्वास्थ्य विभाग हड़ताल पर चला जाएगा।
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