साइकिल पर सवार हो सकते हैं हरेंद्र और पंकज मलिक
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस से इस्तीफे के बाद जिले के कद्दावर नेता हरेंद्र मलिक और उनके पुत्र पंकज मलिक के नए सियासी ठिकाने को लेकर अटकलें शुरू हो गई है। हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर भविष्य के बारे में निर्णय लेने की बात कही है। लेकिन सोमवार को लखनऊ में हरेंद्र मलिक की सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात हो चुकी है। मंगलवार को उनके बेटे पंकज मलिक की सपा अध्यक्ष से मुलाकात हुई। माना जा रहा है कि वह सपा में शामिल हो सकते हैं।
जिले के दिग्गज नेताओं में शुमार हरेंद्र मलिक 44 साल का राजनीतिक सफर पूरा कर चुके हैं। बघरा ब्लाक के गांव काजीखेड़ा के निवासी हरेंद्र मलिक ने 1976 और 77 में डीएवी कॉलेज में छात्र राजनीति शुरू की और यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरूआत हुई। 1978 में ये संजय गांधी के साथ नौ दिन तक तिहाड़ जेल में रहे। दिसंबर 1978 में इंदिरा गांधी के साथ आंदोलन में शामिल होकर 13 दिन जिला जेल में रहे। 1982 में ये बीडीसी का पहला चुनाव जीते, लेकिन अंडर एज होने के कारण ब्लाक प्रमुख नहीं बन सके। 1984 में चौधरी चरणसिंह के नेतृत्व में बीकेडी में शामिल हुए। 1985 में खतौली विधानसभा सीट से चुनाव जीते। इसके बाद लगातार तीन बार बघरा विधानसभा सीट से विधायक रहे। 1996 में पहली बार बघरा से चुनाव हार गए। इस बीच सपा से लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गए। सन 2002 में ये इनेलो में शामिल हो गए और राज्यसभा पहुंच गए। 2008 तक राज्य सभा में रहे। इसी बीच 2004 में कांग्रेस में शामिल होकर अपने बेटे पंकज मलिक को बघरा से उप चुनाव लडवाया और जीत गए। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में पंकज मलिक शामली विधानसभा सीट से कांग्रेस से विधायक रहे। बीते 17 सालों से मलिक परिवार कांग्रेस में शामिल था। पंकज मलिक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष थे, हरेंद्र मलिक को पार्टी में कई जिम्मेदारी मिली थी। 17 साल बाद परिवार ने कांग्रेस छोड़ी है।
प्रियंका गांधी के सलाहकार थे हरेंद्र मलिक
लखनऊ। प्रियंका गांधी केसलाहकार और पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने अपने बेटे पंकज मलिक के साथ कांग्रेस छोड़ दी है। पंकज भी वर्तमान में पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष थे। बताते हैं कि पिता-पुत्र पार्टी में उम्मीद के मुताबिक तवज्जो न मिलने से खफा थे। हालांकि, इस्तीफे में इसकी वजह का कोई जिक्र नहीं है। पूरे मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से भी चुप्पी साध ली गई है।
प्रियंका के राजधानी लखनऊ में मौजूदगी के दौरान इसे पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पंकज मलिक कांग्रेस विधायक दल के उप नेता भी रह चुके हैं। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, त्यागपत्र देने वाले इन दोनों नेताओं का आरोप है कि पार्टी में पुराने नेताओं की उपेक्षा की जा रही है। वर्तमान में पार्टी पर कुछ मैनेजर पूरी तरह से हावी हैं, जबकि किसी अन्य पार्टी में ऐसा नहीं है। यहां मैनेजरों के नाम हर कार्यकर्ता के जुबान पर चढ़ा रहता है, वहीं, अन्य पार्टियों में नेताओं के मैनेजरों के नाम कोई नहीं जानता।