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बेटियों संग सांझी मां की मूर्ति बना महिला दे रही है आत्मनिर्भरता का संदेश,

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मोरना में अपने घर पर सांझी माता की मूर्ति बनाती संगीता व उसके बाल कारीगर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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भोपा। प्राचीन काल से चित्रकारी, शिल्प कला के अलावा धातुओं, लकड़ी, हाथी दांत, पत्थर और मिट्टी पर दस्तकारी की कला लोकप्रिय रही है। समय के साथ साथ इसमें नई तकनीकी जुड़ती चली गई है। ऐसी कलाकारी के माध्यम से मोरना निवासी महिला अपनी बेटियों सहित सांझी मां की भव्य मूर्ति बनाने का कार्य कर रही है। वह एक कला के साथ जहां संस्कृति को चार चांद लगा रही है, वही अन्य महिलाओं को आत्म निर्भरता का संदेश दे रही हैं।
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मोरना निवासी सुरेश प्रजापति की पत्नी संगीता देवी पिछले 5 वर्षों से अपनी कलाकारी की हर क्षेत्र में अमिट छाप छोड़े हुए हैं। संगीता अपनी 11 वर्ष की बेटी आरती, ज्योति, भारती सहित दो छोटे बेटे मनोज व दीपक के साथ अपने घर पर ही सांझी माता की मूर्ति बना रही हैं। संगीता बताती है कि वह अपने बच्चों को जहां शिक्षित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वही आत्मनिर्भर बनकर परिवार चलाने में अपने पति का पूर्ण सहयोग कर रही है। संगीता ने बताया कि वह हर वर्ष नवरात्रों से पहले एक माह तक सांझी बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर करती है। इससे एक अच्छी मजदूरी उन्हें मिल जाती है। पूरे मोरना ब्लॉक में केवल उनके द्वारा ही सांझी माता की मूर्ति बनाई जाती हैं। वह बताती है कि मेहनत तो अधिक है और कार्य भी बड़ी मेहनत के साथ करना पड़ता है, लेकिन मेहनत के अनुसार उन्हें मजदूरी मिल जाती है। वह 20 रुपये से लेकर 11 सौ रुपये तक की कीमत की सांझी तैयार करती हैं। उनके पति सांझी माता की बिक्री में सहयोग करते हैं। बेहतर कारीगरी से तैयार करने के बाद उसमें चटकीले रंग भर कर भव्य रुप दिया जाता है जिसके लिए लोग दूर-दूर से उनके यहां सांझी माता खरीदने आते हैं। संगीता ने अन्य महिलाओं से भी कहा है कि वह इस तरह के कार्य कर आत्मनिर्भर बने और अन्य महिलाओं को भी संदेश दे।
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