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गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन खतरा बरकरार

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मुजफ्फरनगर : शुकतीर्थ स्थित गंगा खादर में खेतों में भरा बाढ़ का पानी। - फोटो : KHATAULI
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गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन खतरा बरकरार
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रामराज/मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। तीन दिन बाद गंगा बैराज पर जलस्तर घटा है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे 219.90 मीटर दर्ज किया गया है। फिर भी प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी है। क्योंकि अभी जलस्तर घटा है, खतरा नहीं। गंगा का पानी ग्रामीणों के खेतों में पहुंचने से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने के कारण आवागमन प्रभावित है।
सोमवार को गंगा का जलस्तर घट गया। हालांकि बाढ़ के कारण कई गांव के ग्रामीणों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। फसलें बर्बाद होने के साथ ही ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए चारे का संकट सताने लगा है। जीवनपुरी व रामपुर ठकरा निवासी रोहताश, राजवीर, अमर सिंह, मान सिंह, तिलक राम का कहना है कि उनकी फसलें बाढ़ के पानी के कारण बर्बाद हो गई है। उनके पशु बिना चारे के भूखे मरने की कगार पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि दो दिन से प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनके गांव में उनकी समस्या जानने के लिए नहीं आया। सिंचाई विभाग के जेइ पीयूष कुमार ने बताया कि सोमवार को गंगा बैराज का डॉउन स्ट्रीम एक लाख 35 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया है। गंगा बैराज में डॉउन स्ट्रीम में जलस्तर सुबह 219.80 दर्ज किया गया है। गंगा बैराज का जल स्तर लगातार घटता जा रहा है।
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आठ साल बाद खादर क्षेत्र में आई बाढ़ की स्थिति
रामराज। गांव जीवनपुरी निवासी संजीव शर्मा, आशीष, जीत सिंह, गोपाल ने बताया कि आठ साल पहले 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के समय पर खादर क्षेत्र में बाढ़ आई थी। उस समय खादर क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। ग्रामीणों की समस्त फसलें बर्बाद होने के साथ ही कई गांव भी पूरी तरह तबाह हो गए थे। उधर, बाढ़ पीड़ित गांव जीवनपुरी, रामपुर ठकरा, रहड़वा, हंसावाला के ग्रामीणों का कहना कि समय पर गंगा की सफाई न होने के कारण गंगा में रेत की सिल्ट जम जाती है। नतीजतन पहाड़ों से आया पानी गंगा से ओवरफ्लो होकर खादर क्षेत्र के जंगलों से होता हुआ गांवों में घुस जाता है और बाढ़ की स्थिति बन जाती है। उधर, गांव रामपुर ठकरा निवासी सतनाम सिंह ने बताया कि उनके गांव की आबादी लगभग 200 की है। गांव के दर्जनों किसान परमल की खेती करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। बाढ़ के कारण सभी किसानों की करीब तीन सौ बीघा परमल की फसल पूरी तरह बाढ़ के पानी से बर्बाद हो गई है।
संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका
मीरापुर। जलस्तर कम होने पर भी ग्रामों और खेतों में पानी भरा है। ऐसे में संक्रमण रोग फैलने की आशंका बन जाती है। दो-तीन दिन बाद पानी सड़ने पर बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा रहेगा। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम भी नहीं आई है।
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प्रशासन अभी अलर्ट
गंगा का जलस्तर घटा है, फिर भी प्रशासन अलर्ट है। बाढ़ चौकियां काम कर रही है। संपर्क मार्गों का पानी कम होने पर राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी बाढ़ प्रभावित ग्रामों का दौरा कर दवाई आदि का वितरण करेगी - आलोक कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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