महाशय गंगा सहाय राजनाथ सिंह से मुलाकात करते हुए। फाइल फोटो। (दाएं)
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भारत छोड़ो आंदोलन : जेल गए थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय गंगा सहाय
खतौली। गांव तिगाई में जन्मे महाशय गंगा सहाय भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गए थे। आजादी के बाद से वह हमेशा हवा में लहराते हुए राष्ट्रीय ध्वज को देखकर बहुत खुश होते थे। वह कहते थे कि देश सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है।
गांव तिगाई में 12 अगस्त 1915 को कुंदन सिंह के घर में जन्में महाशय गंगा सहाय के दिल में देश भक्ति का जज्बा युवावस्था से ही भरा था। महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ चलाए गए सत्याग्रह आंदोलन में किशोरावस्था में ही उन्होंने देश को आजादी दिलाने का बीड़ा उठाया था। 23 अप्रैल 1941 में सत्याग्रह आंदोलन का प्रचार करते हुए अंग्रेजी फौज ने उन्हें गांव से ही गिरफ्तार करवा कर शाहजहांपुर में जेल में डलवा दिया था। वह वहां पर एक वर्ष तक जेल में रहे। उन्होंने उस समय 35 रुपये का जुर्माना भी दिया था। इसके बाद 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों के विरुद्ध भारत छोड़ो आंदोलन में दोबारा से गिरफ्तार कर लिए गए और मुजफ्फरनगर की जेल में 11 महीने तक बंद रहे। इसके बाद गोरक्षा आंदोलन में दिल्ली में सत्याग्रह किया और कनॉट प्लेस थाने में गिरफ्तार करने के बाद उन्हें हिसार की जेल में डाल दिया गया था, जहां पर वह एक माह तक जेल में रहे। उनके रिश्तेदार सुनील बताते हैं कि तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा तथा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें सम्मानित किया था। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एचएन बहुगुणा ने भी स्वतंत्रता सेेेनानी महाशय गंगा सहाय को मेरठ में ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया था। महाशय गंगा सहाय का 99 वर्ष की आयु में 22 अक्तूबर को 2013 को निधन हो गया। वर्तमान में उनका परिवार जैन मंडी खतौली में रहता है।