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मोबाइल पर लाड़लों की सूरत देख मिल रहा सुकून

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मुजफ्फरनगर। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से हो रहे नुकसान की खबरें परिजनों की चिंता बढ़ा रही हैं। वीडियो कॉल के जरिए मोबाइल पर लाड़लों की सूरत देखकर ही सुकून मिल रहा है। कोई एयरपोर्ट पर फंसा है, कोई यूनिवर्सिटी में है। कोई अपने अपार्टमेंट से नहीं निकल सका। किसी ने रेल का सफर किया, लेकिन फ्लाइट नहीं पकड़ सका। बेबसी ऐसी है कि हर कोई वापस आना चाहता था, लेकिन महंगे टिकट के रुपये नहीं थे। हर घर की समस्या अलग है, लेकिन चिंता सिर्फ लाड़लों की वापसी की है। मोबाइल की स्क्रीन पर बेटे-बेटियों की सूरत देखकर परिजन, रिश्तेदार और दोस्त खुद को समझा रहे हैं।
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कीव एयरपोर्ट पर फंसा मीरापुर का हार्दिक
मीरापुर। कस्बे के मोहल्ला मुस्तर्क निवासी सुनील शर्मा का पुत्र हार्दिक यूक्रेन की तरनोविल यूनिवर्सिटी में मेडिकल का छात्र है। हार्दिक की 24 फरवरी को स्वदेश लौटने के लिए फ्लाइट थी, लेकिन इसी बीच रूस ने कीव एयरपोर्ट को ध्वस्त कर दिया, जिससे छात्र एयरपोर्ट पर ही फंसे हुए हैं। परिवार चिंतित है और पलपल की जानकारी ले रहे हैं।
जैनब भी यूक्रेन में फंसी
मीरापुर। कस्बा निवासी डॉ. महबूब आलम की पुत्री जैनब भी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। उसकी 25 फरवरी को परीक्षा थी, जिसके बाद स्वदेश लौटना था, लेकिन इसी बीच युद्ध शुरू हो गया। जिस कारण जैनब कीव में फंसी हुई है।
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जानसठ के छह छात्र मुश्किल हालात में
जानसठ। कस्बे के रहने वाले मोहम्मद मुस्तकीम, अनस व शाहफेज, गांव पिमौड़ा निवासी फिरोज आलम, मोहम्मद रजी, सलमान यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। परिजनों का कहना है कि वीडियो कॉल के जरिए वह लाड़लों के संपर्क में है। दूतावास के अधिकारी सहयोग कर रहे हैं। पिछले तीन-चार दिनों से उनके बच्चे कमरों में कैद होकर रह गए हैं। परिवारों को बच्चों की चिंता सता रही है। संवाद
विन्नित्सिया में सिकंदरपुर की अफशां
सिकंदरपुर गांव की अफशां एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गई है। विन्नित्सिया शहर में रहकर वह पढ़ाई कर रही है। वापसी का टिकट बुक होने के बावजूद वह स्वदेश नहीं लौट पा रही है। ग्राम प्रधान चंगेज खान ने बताया कि युद्ध शुरू होने के कारण अफशां वापस नहीं लौट पा रही है।
एयरपोर्ट पर फंसा है सोरम का अनस
शाहपुर। क्षेत्र के गांव सोरम निवासी तनवीर चौधरी ने बताया कि उनका बेटा अनस चौधरी एमबीबीएस करने यूक्रेन गया है। युद्ध के हालात बनने पर वह कीव एयरपोर्ट पर पहुंच गया था, लेकिन वहां से निकल नहीं पा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास सैकड़ों भारतीय छात्र है और दूतावास के संपर्क में है। दूतावास के अधिकारी छात्रों को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार तक अनस के लौट आने की संभावना है। परिजन लगातार वीडियो कॉल से संपर्क में है।
किराया नहीं बढ़ता, तो वह घर लौट आता
जानसठ। गांव पिमौड़ा निवासी फिरोज आलम ने अपने परिजनों से मोबाइल फोन पर शुक्रवार को कई बार बातचीत की। उसने फोन पर बताया कि मैं बिल्कुल ठीक हूं। उसको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वह अपने दोस्तों के साथ कमरों में कैद हैं। कमरे से बाहर निकलने में उसको डर लगता है। छात्र ने फोन पर अपने परिजनों को बताया कि युद्ध होने से पहले व फ्लाइट के द्वारा अपने घर आ सकता था, लेकिन फ्लाइट का किराया 20 हजार रुपये से लेकर 40 हजार महंगा हो गया था। इसलिए वह गांव नहीं लौट सका। छात्र ने बताया कि उसके पास 40 हजार रुपये नहीं थे, इसलिए वह युद्ध से पहले फ्लाइट से नहीं आ सका।
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