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आवश्यकता से अधिक कीटनाशक का प्रयोग न करें किसान: डॉ बक्शी राम

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मुजफ्फरनगर। गन्ने की प्रजाति 0238 के जनक एवं शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट कोयम्बटूर के पूर्व निदेशक डॉ. बक्शीराम ने गांव लछेड़ा में गन्ने के खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को फसल के बीमारी से बचाव के लिए सुझाव भी दिए। कहा कि किसान कीटनाशक का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करें।
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गन्ना विभाग और चीनी मिल मंसूरपुर के अधिकारियों के साथ डॉ. बक्शीराम गांव लछेड़ा और पुरबालियान पहुंचे। किसान चंद्रपाल सिंह, प्रमोद, चंद्रवीर, संतरपाल समेत अन्य किसानों के खेतों का स्थलीय भ्रमण किया। गन्ने की फसल पर कीट और रोगों को देखा। लछेड़ा के किसान चंद्रपाल सिंह की ओर से लगाए गए गन्ने की नवीनतम किस्म सीओएस 13235 और सीओ 15023 को भी टीम ने देखा। नवीनतम गन्ना किस्म सीओएस 13235 की फसल में अच्छी बढ़वार और फुटाव दिखा और कीट का आपतन भी कम दिखा।
लछेड़ा में ही चीनी मिल की ओर से किसान गगन व प्रमोद के खेत पर लगवाए गए गन्ने की नर्सरी जो गन्ना किस्म सीओ 0238 की है, में टॉप बोरर कीट का काफी असर देखा गया। किसानों ने बताया कि इस बार गन्ने की फसल पर टॉप बोरर (चोटी बेधक) का काफी प्रकोप है। जिसे नियंत्रित करने में कई रसायनों का प्रयोग किया गया है।
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सलाह दी कि फसल में आवश्यकता के अनुसार और उचित रसायनों का प्रयोग ही करे। डीसीओ डॉ. आरडी द्विवेदी, खांडसारी अधिकारी चंद्रशेखर सिंह, चीनी मिल मंसूरपुर के महाप्रबंधक गन्ना बलधारी सिंह, उत्तम वर्मा आदि मौजूद रहे।
किसानों को दिया सुझाव
डॉ. बक्शीराम ने किसानों को चोटी बेधक के नियंत्रण को वर्तमान में क्लोरेन्ट्रेनिलीप्रोल (कोराजन) या समतुल्य रसायन की 150 मिली मात्रा 400 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ खेत में स्प्रेयर की नोजल निकाल कर, गन्ने की जड़ों में डाल कर, खेत की सिंचाई करने की सलाह दी। किसान इस रसायन का पत्तियों पर छिड़काव न करें केवल गन्ने की जड़ों में ड्रेंचिंग करें, तभी उचित नियंत्रण हो सकेगा।
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