- लखनऊ निवासी युवक के मोबाइल नंबर से बनाई फर्जी लाइसेंस आईडी, रिपोर्ट दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले में खनन विभाग के सरकारी पोर्टल के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। अज्ञात लोगों ने खनन अधिकारी की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर लखनऊ निवासी युवक के मोबाइल नंबर से फर्जी लाइसेंस आईडी बना ली। इस आईडी से 76 वाहनों के लिए ई-फॉर्म-सी रवन्ना (रवन्ना) जारी किए गए। इन फॉर्म में करीब 1900 घनमीटर गिट्टी (रोड़ी ) दर्ज दिखाई थी। आईडी को ब्लॉक कर दिया गया है।
खनन अधिकारी आशुतोष छिरोल्या ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। लिखाया गया कि 21 सितंबर की शाम करीब साढ़े 5 से पौने छह बजे वीटीएस-डीजीएम ऐप पर मुजफ्फरनगर से ई-फॉर्म-सी जारी होने की संदिग्ध गतिविधि दिखाई थी।
विभागीय जांच में पता चला कि जिले में कोई भंडारण लाइसेंस स्वीकृत नहीं था। इसके बावजूद पोर्टल पर भंडारण स्थल दर्शाकर ई-फॉर्म-सी जारी हो रहे थे। यह जानकारी भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ को दी गई।
निदेशालय की जांच में एक लाइसेंस आईडी के जरिए लगातार ई-फॉर्म-सी जारी होने का पता चला। जाली लाइसेंस और तकनीकी खामी यूपी माइंस पोर्टल पर लाइसेंसी आईडी 31142603990001 दर्ज थी। इसमें लाइसेंसी का नाम शाना अहमद अहमदगढ़, मुजफ्फरनगर दर्ज था।
पोर्टल की खामी का उठाया फायदा खनन विभाग के रिकॉर्ड में उक्त लाइसेंस की कोई वैध स्वीकृति नहीं मिली। खनन अधिकारी ने लिखाया कि यह लाइसेंसी आईडी उन्होंने नहीं बनाई थी। आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर कुछ दिनों से ओटीपी नहीं आ रहा था।
आरोपी ने पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाया, क्योंकि पोर्टल खोलने व लॉगिन के लिए ओटीपी की आवश्यकता नहीं पड़ रही थी। लॉगिन खुल रहा था। एसपी सिटी अमृत जैन ने बताया कि जांच शुूर कर दी है।
किसने किया लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल
पुलिस जांच कर रही है कि खनन अधिकारी की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किसने किया। फर्जी लाइसेंस आईडी किसने तैयार की, यह भी जांच का विषय है। 76 वाहनों के ई-फॉर्म-सी किस व्यक्ति या नेटवर्क के माध्यम से जारी किए गए, इसकी पड़ताल होगी। पुलिस ई-फॉर्म-सी में दर्ज सभी वाहनों का सत्यापन करेगी। यह पता लगाया जाएगा कि खनन सामग्री का वास्तविक परिवहन हुआ था या नहीं। यदि परिवहन हुआ तो गिट्टी कहां से उठाई गई और कहां पहुंचाई गई, इसकी भी जांच की जाएगी। मामले की जांच में खनन पोर्टल का डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस संबंधित लाइसेंस आईडी से हुए लॉगिन, ई-फॉर्म-सी जनरेट होने का समय की जांच करेगी। विभागीय अधिकारियों ने लाइसेंस में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया था। तो कॉल सुनने वाली महिला थी। उसने बताया कि वह लखनऊ से है। यह नंबर उसके पति जुनैद का है। उसे लाइसेंस की जानकारी नहीं थी। खनन विभाग के रिकॉर्ड में इस लाइसेंस की कोई वैध स्वीकृति नहीं मिली।
ऐसे जागे अधिकारी
वादी खनन अधिकारी ने बताया कि जिन वाहनों (ट्रकों) में गिट्टी लोड करना दिखाया गया उनके मालिकों ने उनसे संपर्क कर यह जानकारी दी जबकि गिट्टी को ले जाने के लिए विभाग ने कोई रवन्ना नहीं काटा गया। वाहन मालिकों ने चालीस घंटे का रवन्ना काटे जाने की जानकारी दी थी। यह पता चलते कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर जनपद में कहीं भी गिट्टी का काम नहीं होता। जबकि 76 वाहनों में गिट्टी ले जाने का रवन्ना काटा गया था।