एआरटीओ दफ्तर में बनवाए जाते थे फर्जी कागजात
मुजफ्फरनगर। शहर कोतवाली में पकड़े गए वाहन चोर गिरोह के तार सीधे एआरटीओ ऑफिस से जुड़े पाए गए हैं। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि वाहन चोर गिरोह में केवल दो सदस्य ही हैं, जिनमें खालापार निवासी फिरोज पुत्र उमरदराज के संबंध सीधे एआरटीओ दफ्तर से जुड़े हुए हैं।
इंस्पेक्टर ने बताया कि पूछताछ में फिरोज ने बताया कि वे चोरी के वाहनों के असली चेसिस नंबर मिटाकर नए नंबर अंकित कराते थे। इसके बाद एआरटीओ दफ्तर के कर्मचारी की मिलीभगत से उन नए नंबरों के आधार पर पुरानी बाइकों का ही रजिस्ट्रेशन कराकर नई आरसी व अन्य कागजात हासिल कर लेते थे और बाइकों को नए कागजात के जरिये बेच दिया जाता था। इंस्पेक्टर ने बताया कि यह गिरोह इसी तरह अब तक 50 से अधिक बाइकों को बेच चुका है, जिन्हें आरोपियों से पूछताछ के बाद चिह्नित किया जा रहा है। वहीं, वाहन चोर एआरटीओ गिरोह में किस कर्मचारी से सांठ-गांठ कर पुरानी बाइकों को नया दिखाकर रजिस्ट्रेशन कराता था, इसकी जांच के लिए टीम का गठन किया जा रहा है। इन कर्मचारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, सिविल लाइंस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर डीके त्यागी ने बताया कि बझेड़ी रोड से पकड़े गए वाहन चोर गिरोह का सरगना शहजाद पुत्र सत्तार है। दुपहिया वाहन चोरी करने के बाद फरार सदस्य फिरोज पुत्र सरताज और जाकिर पुत्र अनवर इनके फर्जी कागजात तैयार करते थे, जिसके बाद इन वाहनों को बेच दिया जाता था। इंस्पेक्टर डीके त्यागी ने बताया कि वाहन चोर गिरोह के सभी सदस्य पुराने अपराधी हैं, जिनके खिलाफ विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। गिरोह का सरगना शहजाद कोविड-19 के चलते 27 मार्च को जेल से पेरोल पर छोड़ा गया था, जिसके बाद उसने गिरोह का गठन कर दुपहिया वाहन चोरी कर फर्जी कागजात के जरिये बेचने का धंधा शुरू कर दिया गया था। गिरोह द्वारा बेची गई बाइकों को भी चिह्नित करने का प्रयास किया जा रहा है।