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डॉ. बृजेंद्र को नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद से हटाया

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डॉ. बृजेंद्र को नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद से हटाया
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मुजफ्फरनगर। चेयरपर्सन और नगर स्वास्थ्य अधिकारी के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल की संस्तुति के आधार पर सीएमओ ने डॉ. बृजेंद्र सिंह को नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अतिरिक्त पद से मुक्त कर दिया है। अब वह एसीएमओ के पद पर कार्य करेंगे। आदेश के बाद ईओ ने उन्हें पालिका से रिलीव भी कर दिया है।
सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार ने बताया कि डॉ. बृजेंद्र कुमार सिंह को नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अतिरिक्त पद से कार्य मुक्त कर दिया गया है। अब वह मूल तैनाती स्थान पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी का कार्य करेंगे। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के 22 फरवरी के पत्र के आधार पर यह आदेश जारी किया है। इस पत्र में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। शासन और चेयरपर्सन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के संचालन में कोई रुचि नहीं ली गई। 21 फरवरी को चेयरपर्सन की विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक में उपस्थित नहीं हुए, उनका फोन भी नहीं उठाया गया। इन सब आरोपों के चलते पद से कार्यमुक्त करने का निर्णय लिया गया। सीएमओ के आदेश के बाद ईओ हेमराज ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को पालिका से रिलीव कर दिया।
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राठी और अतुल के बाद बृजेंद्र
नगर पालिका में एक साल में तीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी हटाए जा चुके हैं। राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के पत्र के बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रविंद्र सिंह राठी को 26 मार्च 2021 में हटाया गया, वह पांच वर्ष तक पालिका में रहे। इसके बाद डॉ. अतुल कुमार को नगर स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया। एक नवंबर 2021 को बोर्ड में बैठक में उनके खिलाफ प्रस्ताव आया और सीएमओ ने उन्हें हटाया। बोर्ड बैठक में उनके साथ मारपीट भी हुई जिसमें एक सभासद प्रवीण कुमार मित्तल जेल गए। डॉ. अतुल को हटाए जाने के बाद एसीएमओ डॉ. बृजेंद्र कुमार सिंह को नगर स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया। 25 फरवरी को इन्हें भी पालिका से कार्यमुक्त कर दिया गया।
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एडीएम पर न्यायालय में किया वाद दायर
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बृजेंद्र कुमार सिंह पद संभालने के बाद से ही चर्चाओं में रहे हैं। एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह ने न्यायालय में इन्होंने वाद दायर कर दिया। आरोप था कि छुट्टी पर रहने के बाद अफसरों ने उन्हें फोन किया और निजी जीवन की शांति को भंग किया। यही नहीं डीएम सीबी सिंह को भी इन्होंने सीधे पत्र लिखा। इनकी कार्यशैली से प्रशासनिक अधिकारी भी नाराज थे।
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