मुजफ्फरनगर। फुलत निवासी इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम चाहते तो एमबीबीएस कर डॉक्टर बन सकते थे, मगर उन्होंने इस्लालिक शिक्षा का चुना। मौलाना कलीम की प्राथमिक शिक्षा फुलत के एक मदरसे में हुई। इसके बाद पिकेट इंटर कालेज खतौली से विज्ञान में इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उन्होंने मेरठ कालेज मेरठ से बीएससी किया। मेेडिकल सेक्टर में कॅरियर बनाने का उद्देश्य लेकर सीपीएमटी प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। इस्लामी साहित्यकारों से प्रभावित होने और इस्लामी लोगों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण मौलाना कलीम ने एमबीबीएस करने के बजाय प्रसिद्घ इस्लामी संस्थान दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ में दाखिला लिया और इस्लामिक शिक्षा को चुना था।
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विदेशी छात्रों की भी जांच हुई थी
मुजफ्फरनगर। मौलाना कलीम के फुलत स्थित जामिया इमाम वली उल्लाह इस्लामिया में पुलिस और खूफिया विभाग की एजेंसी बांग्लादेशी और कश्मीरी छात्रों के संबंध में छानबीन कर चुकी है। जांच में तब यहां ऐसे छात्र नहीं मिले थे। हालांकि वर्तमान में मदरसे में दो कश्मीरी छात्र भी दीनी तालीम हासिल कर रहे है।