दारुल उलूम के नायब मोहतमिम और हदीस के उस्ताद थे अब्दुल खालिक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के नायब मोहतमिम और हदीस के उस्ताद मौलाना अब्दुल खालिक संभली का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। वे 72 वर्ष के थे। उनके इंतकाल पर इस्लामी हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई। दारुल उलूम और जमीयत उलमा-ए-हिंद सहित विभिन्न संगठनों और उलमा ने मौलाना खालिक के इंतकाल को इस्लामी जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
मूल रूप से संभल निवासी मौलाना अब्दुल खालिक पिछले करीब 39 सालों से इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम में सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में वह संस्था में नायब मोहतमिम के पद पर थे और बतौर उस्ताद छात्रों को हदीस की तालीम दे रहे थे। मौलाना अब्दुल खालिक संभली पिछले काफी समय से बीमारी चल रहे थे। जिन्हें उपचार के लिए मुजफ्फरनगर के एक अस्पताल में भर्ती कराया था। शुक्रवार को शाम करीब चार बजे उपचार के दौरान उनका इंतकाल हो गया।
इन्होंने जताया शोक
मौलाना अब्दुल खालिक संभली के इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, मौलाना महमूद मदनी आदि ने दुख का इजहार किया। कहा कि मौलाना खालिक बेहद सादगी पसंद इंसान थे। उनके दुनिया से रुखसत होने से इस्लामिक जगत को बड़ा नुकसान हुआ है। इनके अलावा मुफ्ती-ए-आजम मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा, मौलाना इस्लाम कासमी, मो. नसीम अंसारी एड., जमीयत दावतुल मुसलीमीन के अध्यक्ष कारी इस्हाक गोरा, मुफ्ती जैनुल इस्लाम और मुफ्ती मोहम्मद उल्लाह ने दुख जताया है।