श्री शुकदेव आश्रम में भागवत कथा का शुभारम्भ करते पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज
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मोरना। श्री शुकदेव आश्रम में पुणे महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर मंगल आरती की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण के जितने भी साधन हैं, उनमें श्रीमद्भागवत सबसे सरल, सर्वोत्तम, सुविधाजनक और फलदायी है। भागवत पारमार्थिक अनुभव का सागर है।
स्वामी ओमानंद महाराज ने व्यासपीठ पर नागपुर से पधारे कथाव्यास आचार्य मोहन कुबेर को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके उपरांत, उन्होंने महाराष्ट्र के विद्वान संत स्वामी कृष्णानंद द्वारा रचित शुक उवाच नामक ग्रंथ का विमोचन भी किया। यह ग्रंथ भागवत के दशम स्कंध में भगवान श्री कृष्ण और उद्धव के संवाद पर आधारित है।
स्वामी ओमानंद महाराज ने महाराष्ट्र की महान संत परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि यह प्रांत तपस्वी संतों, भक्तों और वीरों की भूमि है। उन्होंने आगे कहा कि इन संतों का साहित्य आज भी जन-जन का कल्याण कर रहा है।