देवबंद (सहारनपुर)। बोनस की मांग को लेकर मिल कर्मचारियों की हठ के चलते इस बार त्रिवेणी शुगर मिल का नवीन पेराई सत्र समय पर आरंभ होने की संभावना बनती नहीं दिख रही है। क्योंकि कर्मचारी पूरा बोनस दिए जाने की मांग पर अड़े हैं। जिसके चलते गन्ना किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
त्रिवेणी शुगर मिल द्वारा दीपावली के बोनस में कटौती करने से नाराज मिल कर्मचारी 21 अक्तूबर से हड़ताल पर चल रहे हैं। मिल प्रबंधतंत्र और संयुक्त मोर्चा चीनी मिल मजदूर संघर्ष समिति लगातार एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें केवल 8.33 प्रतिशत बोनस दिया जा रहा है, जबकि त्रिवेणी ग्रुप की अन्य मिलों ने अपने कर्मचारियों को 20 प्रतिशत बोनस दिया है। उनका साफ कहना है कि जब तक उन्हें अपना पूरा हक नहीं मिल जाता वह आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं, संयुक्त मोर्चा चीनी मिल मजदूर संघर्ष समिति ने मंगलवार को मीडिया में प्रेस नोट जारी करते हुए अपना रुख रखा है। प्रतिश शर्मा, प्रमोद शाही, सुरेंद्र सिंह और मदन सिंह आदि का कहना है कि शुगर मिल प्रबंधतंत्र लगातार गलत बयानबाजी कर जहां उनका शोषण कर रहा है। वहीं वह ऐसा कर कर्मचारियों और किसानों के बीच टकराव की स्थिति पैदा करना चाहता है, जबकि सच्चाई यह है कि मिल कर्मचारी किसानों के परिवार का ही हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि प्रबंधतंत्र पिछले कई वर्षों में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं कर रहा उल्टा उनका बोनस भी काट लिया जा रहा है। वहीं, मिलकर्मियों की हड़ताल के चलते इस बार मिल का पेराई सत्र 30 अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना नहीं बनती दिख रही है। जिसको लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि मिल का पेराई सत्र समय पर आरंभ नहीं होता तो उन्हें इधर उधर औने पौने दामों में गन्ना बेचने को मजबूर होना पड़ेगा। उधर, शुगर मिल के एक अधिकारी की माने तो कर्मचारियों की उक्त हड़ताल को उपश्रमायुक्त सहारनपुर के द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया है। दावा किया जा रहा है कि काफी संख्या में कर्मचारी जो हड़ताल के समर्थन में नहीं हैं वो एक या दो दिन में काम पर लौट आएंगे।