जिला सहकारी बैंकों के संचालकों और इससे जुड़े नेताओं ने आरबीआई के बैंकों में पैसे जमा न करने के फैसले का विरोध किया है। इसे किसानों का अपमान बताया है। आरबीआई के फैसले से किसानों को धक्का लगा है। साधन सहकारी समिति के माध्यम से जिले के सभी किसान बैंक से जुड़े हैं। संचालकों ने यह भी कहा कि अपने पारदर्शी कार्यों के कारण बैंक को तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है।
बैंक के सभागार में पत्रकारों से वार्ता में पूर्व मंत्री एवं एमएलसी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सौराष्ट्र के सहकारी बैंक में गलत तरीके से पैसा जमा करने की बात कहकर देशभर के बैंकों में रोक लगा देना एक गलत कदम है। अगर किसी ने गड़बड़ की है, वहां जांच होनी चाहिए। किसान के सामने बीज-खाद से लेकर सभी दिक्कतें सामने आ गई हैं। जिले के सहकारी बैंक की अपनी साख है, यहां रोक लगाकर किसानों का अपमान किया गया है।
जिले का प्रत्येक किसान समिति के माध्यम से बैंक से जुड़ा है। दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मुकेश चौधरी ने कहा कि इस समय किसानों और मजदूरों के सामने अपने परिवार के बीमार लोगों को दिखाने को लेकर आ रही है। बैंकों की लाईन में कोई नेता, अफसर और जज नहीं लग रहा, सब गरीब लोग लग रहे हैं। सपा नेता गौरव स्वरुप ने कहा कि केंद्र सरकार को आम आदमी की समस्याओं को समझना चाहिए। जिला सहकारी बैंक के डायरेक्टर विनोद मलिक ने बताया कि हमारा बैंक देश में अपनी पहचान रखता है। तीन बार पहला पुरस्कार पारदर्शी कार्यों के लिए मिल चुका है। जिले में पीएनबी और एसबीआई के बाद तीसरा स्थान है।
बैंक में 1139 करोड़ का डिपोजिट हैं। जिले में 44 ब्रांच है, सभी में नकली करेंसी चेक करने की मशीन लगी है। 1700 करोड़ का लेनदेन है। संचालक नसीम मियां ने कहा कि जिन बैंकों पर आरबीआई विश्वास कर रहा है, ऐसे नेशनलाइज बैंकों को हमने 150 करोड़ उधार दिया है। संचालक ठाकुर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जिले के सहकारी बैंक में चार लाख से अधिक किसानों के खाते हैं। आरबीआई के फैसले से किसानों को सीधे धक्का लगा है। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य जब्बार और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।