नगर पालिका परिषद चेयरमैन पंकज अग्रवाल की कुर्सी को लेकर रस्साकशी जारी है। सत्ताधारी नेताओं ने शासन से बहाली के एक घंटे बाद ही उनके वित्तीय के साथ प्रशासनिक अधिकार भी सीज करने का आदेश जारी करा दिए। आश्चर्य की बात यह है कि पंकज अग्रवाल को न तो बहाली की जानकारी है और न ही अधिकार सीज होने की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेयरमैन पंकज अग्रवाल की याचिका पर उनके प्रशासनिक अधिकार बहाल कर दिए थे। चार मई को आदेश होने के तीन दिन बाद पंकज अग्रवाल ने डीएम को आदेश की कॉपी देते हुए नगर पालिका पहुंचकर कार्यभर ग्रहण कर लिया था। हालांकि इस दौरान कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं था। प्रशासनिक अधिकारी यही कह रहे थे कि मामला शासन को भेज दिया है। शासन जो आदेश देगा, वही माना जाएगा।
बुधवार को यानि हाईकोर्ट के आदेश के 14 दिन बाद नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव कुमार कमलेश का एक पत्र आया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में पंकज अग्रवाल के प्रशासनिक अधिकार बहाल करते हुए उन्हें कार्यभार देने की बात कही गई। इसी के एक घंटे बाद दूसरा पत्र आया कि धारा-48 के अनुसार चेयरमैन पंकज अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है।
जब तक उनका जवाब नहीं आता और मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाते हैं। एडीएम वित्त एवं पालिका के प्रशासक सुनील सिंह ने बताया कि शासन का आदेश मिल गया है। पंकज अग्रवाल के पास अब कोई अधिकार नहीं रह गया है।
मुझे जानकारी नहीं दी गई
मुजफ्फरनगर। बर्खास्त किए गए चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि उन्हें न तो अधिकार बहाली की कोई जानकारी दी गई और न ही अधिकार सीज होने की कोई जानकारी दी गई। सबकुछ लुकाछिपी का खेल चल रहा है।