जिंदगी बचाने में दानवीरों का जज्बा बना मिसाल
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में सोमवार को (आज) विश्व रक्तदान दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनरतले रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। आइए आप भी इस महाअभियान में स्वेच्छा से रक्तदान कर अमर उजाला के सहभागी बनें। जिले में सैकड़ों महादानी हैं, जो इस पुनीत कार्य में बार-बार रक्तदान कर जरूरतमंदों के लिए जीवन की उम्मीद बनते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े रक्तदाताओं ने दूर शहरों में जाकर भी लोगों की जिंदगी बचाई है।
रिकॉर्ड 67 बार रक्तदान करने वाले गांव ककराला निवासी राजेंद्र जैन का व्यक्तित्व समाज के लिए मिसाल है। बड़ा बाजार खतौली में जनरल मर्चेंट की दुकान करने वाले जैन वर्ष 1997 से इस पुनीत कार्य में जुटे हैं। शनिवार को दिल्ली अपोलो से खबर मिली कि हरिद्वार के एक मरीज दीपक गिरि के गुर्दे के प्रत्यर्पण होना है, जिसके लिए खून की जरूरत है। यह जानकारी मिलते ही राजेंद्र जैन स्वेच्छा से दिल्ली गए और मरीज की जान बचाने के लिए रक्तदान किया।
मंसूरपुर में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. विनोद कुमार बहादरपुर गांव निवासी हैं। वे अब तक जिला अस्पताल, बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज के साथ ही मेरठ व दिल्ली में 47 बार रक्तदान कर चुके हैं। डॉ. विनोद का कहना है कि रक्तदान से कई लाइलाज बीमारियों का खात्मा होता है। वे समर्पित भाव से डेरा सच्चा सौदा के माध्यम से ही रक्तदान से जुड़ गए, जिससे उन्हें भरपूर आनंद मिल रहा है।
शहर के गांधी कॉलोनी निवासी अमित पटपटिया भी समर्पित युवा समिति से जुड़कर अब तक 31 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कोरोना काल में छह रक्तदान शिविरों का भी आयोजन किया, जिसमें 520 लोगों ने रक्तदान किया।
गांव कुल्हेड़ी में चिकित्सक डॉ. रजनीश त्यागी अब तक 14 बार रक्तदान कर चुके हैं। वे वर्ष 2000 से लगातार इस अभियान रूपी महायज्ञ में आहुति देते आ रहे हैं।
समर्पित महिला शक्ति से जुड़ी मनी पटपटिया का जज्बा भी रक्तदान करने में बेमिसाल है। वे अब तक 21 बार रक्तदान कर चुकी हैं।
शहर के समर्पित महिला शक्ति की सदस्य राखी ग्रोवर भी संस्था की प्रेरणा से अब तक छह बार रक्तदान कर चुकी हैं। वे कहती हैं कि रक्तदान से कोई दिक्कत नहीं आती।
दृढ़ संकल्प के साथ 23 वर्षीय सौरभ मित्तल भी अब तक 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। सौरभ कहते हैं कि रक्तदान से शरीर में स्फूर्ति आती है और नई ऊर्जा का संचार होता है।