मुजफ्फरनगर। सूबे में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के प्रभाव वाले शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ में दूसरे स्थान पर खिसक गई। मुजफ्फरनगर लोकसभा की चरथावल, बुढ़ाना और सरधना सीट पर भी गठबंधन काबिज गया। बालियान का कहना है कि जनता ने 2017 से अधिक वोट दिया, लेकिन कुछ सीटों पर समीकरण ऐसे बनें, जिसकी वजह से हार हुई है। उनका मानना है कि किसान आंदोलन का बहुत ज्यादा चुनाव पर असर नहीं पड़ा है। नतीजों के बाद उनसे हुई बातचीत के अंश....
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सवाल : मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ में 2017 के मुकाबले भाजपा की हार की क्या वजह मानते हैं।
जवाब : जिन सीटों पर हार हुई, वहां भी भाजपा का वोट बैंक बढ़ा है। कई जगह हार-जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। जहां हार हुई हो सकता है, वहां जनता के नजरिए से किसी काम में कमी रह गई हो, फिर से लोगों के बीच जाकर मेहनत करेंगे।
सवाल : किसान आंदोलन का नतीजों पर कितना असर मानते हैं?
जवाब : सरकार कृषि कानून तो पहले ही वापस ले चुकी थी। बुढ़ाना सीट पर आंशिक असर इस मुद्दे का रहा, लेकिन अन्य किसी सीट पर किसानों ने नकार दिया। बागपत के नतीजे सबके सामने हैं।
सवाल : आपकी नजर में भाकियू का चुनाव के नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ा है?
जवाब : सब जानते हैं भाकियू ने विपक्ष की तरह चुनाव लड़ा। भाकियू अध्यक्ष ने सिंबल दिए। लेकिन किसान भाजपा के साथ मजबूती से खड़े हैं। बुढ़ाना सीट पर भी किसानों ने भाजपा को खूब वोट दिए हैं। भाकियू का बहुत ज्यादा असर नहीं रहा।
सवाल : क्या आप मानते हैं कि टिकट वितरण में कुछ बदलाव होने चाहिए थे?
जवाब : मुझे लगता है कि मीरापुर में स्थानीय और बाहरी के मुद्दे ने जोर पकड़ा। यहां स्थानीय प्रत्याशी बनाया जा सकता था, लेकिन प्रशांत गुर्जर ने भी मजबूती से चुनाव लड़ा है।
सवाल : चुनाव के बाद की क्या रणनीति है, कौन से ऐसे काम है जो होने चाहिए।
जवाब : विकास और कानून व्यवस्था भाजपा की प्राथमिक रही है। चुनाव हो चुका है, अब रुके हुए कार्यों को फिर शुरू किया जाएगा। जनता के हित के काम कराए जाएंगे।