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हिंदी भाषा में सब गुण विद्यमान

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हिंदी है हम, अभियान के तहत कराई गई वेबिनार में शामिल साहित्यकार और कवि। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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हिंदी भाषा में सब गुण विद्यमान
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मुजफ्फरनगर। हिंदी हैं हम अभियान के तहत आयोजित वेबिनार में साहित्यकारों, कवियों ने जुड़कर विचार साझा किए। मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के क्या उपाय हो, साथ ही हिंदी भाषा का विकास, दशा एवं दिशा, इस पर अपना मत प्रकट किया।
- भाषा व्यक्ति की आंतरिक पहचान का, राष्ट्र की एकता का और संस्कृति के संवाहक का पर्याय होती है। हिंदी भाषा में ये सब गुण विद्यमान हैं। हिंदी की इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए आजादी पूर्व के राजनेताओं ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में चुना। यह हिंदी की ही सामर्थ्य थी कि देश अपनी तमाम भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद एकता के सूत्र में बंध सका। सोशल मीडिया पर अंग्रेजी के की-पैड और अंग्रेजी के बहुतायत शब्दों की बाध्यता भी इसके महत्व को कम नहीं कर पाई है, जिससे हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ तक जा पहुंची है। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हिंदी के मूल स्वरूप और मूलभावना का सम्मान करें। - डॉ अमित धर्मसिंह, साहित्यकार एवं हिंदी प्रवक्ता
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- प्रत्येक भाषा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होती है, जिनमें राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति व परंपराएं निहित होती हैं। ये राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है। आज नई पीढ़ी हिंदी भाषा के संस्कारों से दूर होती जा रही है। न तो युवा ठीक से लिख पाते हैं, न पढ़ पाते हैं और न ही बोल पाते हैं। हिंदी हम सबके जीवन का अनिवार्य अंग बनना चाहिए, तभी हमारा देश विश्व में आगे बढ सकता है, उत्थान कर सकता है। हिंदी ही देश को एक सूत्र में बांध सकती है। - डॉ बीएस त्यागी, साहित्यकार
- हिंदी विशाल चरित्र वाली भाषा है और अन्य भाषाओं के शब्द सहज रूप से अंगीकार कर लेती है। बटन, कॉलर, सूट, जिम्नास्टिक, कैफे व होटल जैसे शब्दों की स्वीकार्यता हिंदी के विशाल चरित्र की बानगी मात्र है। इस भाषा का भाव सौंदर्य और चरित्र है, जो अन्य भाषाओं के शब्दों को भी अपने में सहज रूप में ढाल लेती है। हिंदी के विकास के लिए अन्य भाषाओं का अध्ययन और उसके शब्दों की स्वीकार्यता बेहद जरूरी है। - नेमपाल प्रजापति, हास्य-व्यंग्य कवि
- हिंदी पट्टी में आज शहर ही नहीं, गांव में भी सुबह उठते ही शिक्षित वर्ग हिंदी अखबार और चाय उठा लेता है। हमारे घरों में लगे टीवी पूरे परिवार के दिन को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हवाले करता है और इस पर प्रसारित होने वाले सभी कार्यक्रम हिंदी में ही होते हैं। अंग्रेजी माध्यम से शिक्षित युवा भी आपस में हिंदी में ही बात करते हैं और सोशल मीडिया पर रोमन लिपि में हिंदी ही लिखते हैं। द सीक्रेट और द अलकेमिस्ट जैसी किताबें हिंदी के माध्यम से ही युवाओं से जुड़ती हैं। - कमल त्यागी, कवि
- हिंदी को राजभाषा और राष्ट्रभाषा घोषित हुए बहुत लंबा समय हो चुका है। जब तक सरकारी कार्यालयों और उच्च शिक्षा में हिंदी का प्रयोग नहीं होगा, तब तक हम इसको वास्तविक गौरव नहीं दे पाएंगे। पारिभाषिक और तकनीकी शब्दावली को लेकर गंभीर प्रयास किए जाने की महती आवश्यकता है। - परमेंद्र सिंह, कवि
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- आज अन्य भारतीय भाषाओं में से हिंदी में किए गए साहित्य के अनुवाद का हिंदी क्षेत्र में पठन-पाठन हो रहा है, साथ ही हिंदी साहित्य का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादक होकर भारत के कोने-कोने में पहुंच रहा है। इस प्रकार आज अनुवाद के माध्यम से हिंदी सामाजिक, सांस्कृतिक व वैज्ञानिक वैचारिकता का आदान-प्रदान करने का दायित्व भी निभा रही है। नई शिक्षा नीति में हिंदी को लेकर लगभग चुप्पी साध ली गई है। राष्ट्र की एक सूत्रता के लिए एक राष्ट्र व्यापी भाषा की आवश्यकता होती है। अत: नई शिक्षा नीति के अंतर्गत हिंदी को पर्याप्त संभावनाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार कुछ न कुछ उपाय अवश्य करेगी, ऐसी आशा की जाती है। - हरपाल सिंह अरुष, साहित्यकार एवं पूर्व बीएसए।

हरपाल सिंह अरुष- फोटो : MUZAFFARNAGAR

सरदार परमेंदर सिंह- फोटो : MUZAFFARNAGAR

कमल त्यागी- फोटो : MUZAFFARNAGAR

नेमपाल प्रजापति- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डॉ बीएस त्यागी।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डॉ अमित धर्म सिंह, साहित्यकार एवं हिंदी प्रवक्ता।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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