मुजफ्फरनगर। दिवाली के बाद से जनपद में वायु प्रदूषण का ग्राफ खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। शनिवार को वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 319 दर्ज किया गया जो राजधानी दिल्ली से भी ज्यादा रहा। चिकित्सकोंं की ओर से सांस और अस्थमा रोगियों को घरों पर ही रहने की हिदायत दी जा रही है।
मौसम में परिवर्तन हो रहा है। धीरे-धीरे तापमान गिर रहा है। सुबह और शाम के समय आसमान में स्मॉग छा जाता है। इन हालात में सांस और अस्थमा रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को वायु प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया। वायु में प्रदूषणकारी तत्व जैसे पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड के तत्व बढ़ने से सांस के रोगियों को दिक्कत होती है।
फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है वायु प्रदूषण
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.योगेन्द्र त्रिखा का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने से फेफड़े प्रभावित होने का खतरा रहता है। वायु प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा और सीओपीडी के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे हालात में अस्थमा रोगियों को घरों पर ही रहना चाहिए। आम लोग भी घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाएं। घरों में कोयले की अंगीठी न जलाएं।
प्रदूषण कम करने को कराया पानी का छिड़काव
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ.गीतेश चंद्रा ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में ग्रेप टू की पाबंदियां लागू हैं। प्रत्येक स्तर पर मानकों का पालन कराया जा रहा है। उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी। वायु प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए उद्यमियों सहित निकायों के माध्यम से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।