बुढ़ाना। मंगलवार सुबह 06 बजे। करौदा महाजन के राजेश कुमार के आंगन में सर्पदंश से मौत के बाद बेटी तमन्ना (11) और बेटे पारस (07) के शव रखे हुए हैं। एक तरफ अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं और दूसरी तरफ महिलाओं का करुण क्रंदन। काश...कहानियां सच हो जाती। मुंशी प्रेमचंद की मंत्र कहानी का कोई भगत सब ठीक कर लौट जाता। कोई डॉक्टर कह देता कि घबराने की बात नहीं है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ। नाजों से पाले गए कलेजे के टुकड़ों को पिता ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी तो देखने वालों की आंखें डबडबा गईं।
उम्मीद का हर दरवाजा खटखटाकर मजदूर का परिवार सोमवार रात वापस अपने गांव लौट आया था। मंगलवार सुबह एक साथ भाई-बहन का अंतिम संस्कार किया गया। श्मशानघाट में दोनों की चिता आसपास लगाई गई। पिता मुखाग्नि देने चले तो हाथ कांपे और आंखों से आंसू बहने लगे। नाजों से पाले गए बच्चों की एकाएक मौत से दुनिया सूनी हो गई। गमजदा ग्रामीणों ने किसी तरह अंतिम संस्कार कराया। इसके बाद पीड़ित घर लौटे।
क्या था मामला
फुगाना थाना क्षेत्र के करौदा महाजन गांव में रविवार रात गहरी नींद में बिस्तर पर सोई कक्षा तीन की छात्रा तमन्ना और उसके भाई कक्षा दो के छात्र पारस को सांप ने डस लिया था। दिन निकलने पर पारस के होंठ और तमन्ना की उंगली पर सर्पदंश का निशान मिला। शामली में उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई थी। डॉक्टर ने जवाब दे दिया। परिजन सोमवार रात करीब 12 बजे तक झाड़-फूंक कराते रहे। सपेरों के पास भी लेकर पहुंचे, लेकिन मुर्दा शरीर में जान नहीं लौटी। इससे पहले रात के समय ही परिवार ने सांप को मारकर जंगल में फेंक दिया था।
ननिहाल में रहता है परिवार
करौदा महाजन निवासी अनुसूचित जाति के राजेश कुमार जालंधर में प्राइवेट नौकरी करते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर वह घर आए थे। असल में मृतक बच्चों की दादी राधा अपने मायके में ही परिवार के साथ रहती है। परिवार पर गम का पहाड़ा टूटा तो सैंकड़ो ग्रामीण एकत्र हो गए। मंगलवार को भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। मां प्रतिभा का रो-रोकर बुरा हाल है।