मुजफ्फरनगर। घोटाले की तह तक जाते-जाते बड़े-बड़े कारनामे प्रशासन के सामने आ रहे हैं। शिवकुमार के पिता ईश्वर दयाल ने अपने कार्यकाल में ही 21 सौ बीघा जमीन खसरा खतौनी से गायब कर दी थी। इस जमीन पर शुरू से ही शिवकुमार का कब्जा चला आ रहा है। 1950 में इस जमीन को नॉन जेड ए में शामिल किया गया। इससे यह जमीन जमींदारी विनाश में भी शामिल नहीं हुई।
एडीएम वित्त रामकिशन शर्मा ने बताया कि सोमवार को मजलिसपुर तौफीर में जांच और पैमाइश के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया। शिवकुमार के पिता लेखपाल ईश्वरदयाल ने 1950 में 139 हेक्टेयर जमीन नॉनजेड ए श्रेणी में शामिल करा दी। इस जमीन को खसरा खतौनी में भी नहीं चढ़ाया गया। इस जमीन पर शुरू से ही शिवकुमार के परिवार का कब्जा है। 50 गाटों में यह विभाजित 1359 फसली में तो है, इसके बाद कहीं दिखाई नहीं दी। लेखपाल एक साल में तीन बार जमीन के प्रत्येक गाटे की मौके पर जाकर जांच करता है। जमीन में कौन सी फसल खड़ी है यह लिखता है। इस जमीन का 60 साल से रिकार्ड ही गायब है। इस जमीन पर जो खेती होती है, उसकी उगाही शिवकुमार करता रहा है। शर्मा ने बताया कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। जमीन को खसरा, खतौनी से गायब कर देना बहुत ही बड़ा क्राइम है। इस मामले में उन सभी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई होगी जो अब तक इस क्षेत्र में तैनात रहे हैं।