संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले की 40 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। सितंबर माह में जनपद के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर 3617 गर्भवती महिलाओं की खून की जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक गर्भवती महिला में कम से कम 11 ग्राम प्रति डेसिलिटर खून की मात्रा होनी चाहिए, लेकिन जांच के दौरान 3617 महिलाओं में से 1518 में सामान्य से कम खून पाया गया। वहीं छह महिलाओं में सात ग्राम से कम और 458 में 7.9 ग्राम से कम खून पाया गया।
महिलाओं और किशोरियों में एनिमिया की समस्या बढ़ रही है। मां के अंदर खून की कमी होने के कारण शिशु भी कुपोषण के शिकार पैदा हो रहे हैं। जनपद में इस तरह के काफी मामले सामने आ रहे हैं। जनपद में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत 17 से 21 सितंबर के दौरान 3617 गर्भवती महिलाओं की खून की जांच की गई।
इस दौरान 2099 महिलाओं में खून की सामान्य स्थिति पाई गई, जबकि कुछ महिलाओं में खून कम मिलने से उन्हें हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है। सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने बताया कि महिलाओं की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि महिलाओं में खून की कमी के परिप्रेक्ष्य में यदि बात की जाए तो अपने जनपद की स्थिति अन्य जनपद की तुलना में काफी बेहतर है।
-महिलाओं में एनिमिया के कुछ लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं में खून की कमी के प्रमुख लक्षणों में कमजोरी, आसानी से थक जाना, पीली त्वचा होना शामिल है। इनके अलावा सांस की तकलीफ, बार-बार सिरदर्द होना, चिड़चिड़ा व्यवहार, फटी या लाल जीभ, भूख में कमी, खाने की अजीब सी लालसा भी शरीर में खून की कमी के लक्षण माने जाते हैं।
-भोज्य पदार्थों में आयरन की कमी कारण
चिकित्सकों के अनुसार भोज्य पदार्थों में आयरन की कमी एनिमिया का एक बड़ा कारण है, जबकि शरीर से लगातार रक्तस्राव होना। सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे विटामिन बी-12, फोलिक एसिड की कमी, विटामिन सी की कमी भी शरीर में खून की कमी के प्रमुख कारण हैं।