मुजफ्फरनगर। नगर पालिका में बाबू गिरी आज भी हावी है, जिस कारण पालिकाध्यक्ष के आदेश को ताक पर रख दिया गया। टीएस ने बाबू से पत्र तैयार कराकर ईओ की अध्यक्षता में बैठक करते हुए कुछ विज्ञापन एजेंसियों से वार्षिक शुल्क जमा कराकर विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। जबकि पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल ने नवीनीकरण करने पर रोक लगाई हुई थी। सोमवार को बाबू उक्त फाइल को साइन कराने के लिए पालिकाध्यक्ष के पास पहुंचा तो मामला प्रकाश में आया। पालिकाध्यक्ष ने बाबू को जमकर फटकार लगायी और ईओ से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल ने दिल्ली जाने से पूर्व ईओ विकास सैन, कर निर्धारण अधिकारी अरुण कुमार और कर अधीक्षक आरटी पोरवाल को शहर में लगे अवैध यूनीपोल और होर्डिंग्स हटाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने आदेश दिए थे कि जब तक अवैध यूनीपोल और होर्डिंग्स न हटाए जाए तब तक विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण नहीं होगा। पालिकाध्यक्ष के दिल्ली जाने के बाद उक्त अधिकारियों ने बाबू रामकुमार से एक पत्र तैयार कराया। जिसमें विज्ञापन नियमावली 2008 का उल्लेख करते हुए लाइसेंस संबंधी सभी अधिकार ईओ को होना बताया गया। इसी पत्र पर कर निर्धारण अधिकारी, कर अधीक्षक ने तीन मई को ईओ की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में मीटिंग की। जिसमें पालिकाध्यक्ष के आदेशों को ताक पर रखते हुए कुछ विज्ञापन एजेंसियों से वार्षिक शुल्क जमा कराकर विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया। सोमवार को बाबू उक्त फाइल पर पालिकाध्यक्ष के साइन कराने के लिए उनके कार्यालय में पहुंचा। फाइल को देखकर पालिकाध्यक्ष आग बबूला हो गई। उन्होंने बाबू को जमकर फटकार लगाई और ईओ से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिये। पालिकाध्यक्ष का कहना है आदेश को ताक पर रखकर विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण कर दिया गया है, जो गलत है। इस संबंध में ईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।