शिया सोगवार फूट फूट कर रोए
मुजफ्फरनगर। मजलिस में हजरत कासिम की शहादत का जिक्र सुन शिया सोगवारों की आंखें नम हो गई। मोहर्रम के मौके पर पूरे दिन महिलाओं और बच्चों ने मजलिसों में भाग लिया।
सुनी-सुनी शाम है मौला तेरे बगैर जिंदगी बेनाम है मौला तेरे बगैर की सदाओं के बीच करबला के रणबांकुरे हजरत कासिम की याद में सुबह से ही मोहर्रम के जुलूस देर रात तक जारी रहे। हुसैनी नौजवानों ने नोहा ख्वानी और सीनाजनीं की। इब्ने हसन हजरत कासिम का इमाम बारगाहों में गम छाया रहा। दिन में दो बजे इमाम बारगाह मोती महल पर एक मजलिस का आयोजन हुआ। मर्सिया ख्वानी मिर्जा मुशाहिद , मुशैदी, नुसरत हुसैन ने की। मजलिस को मौलाना इंतजार ने खिताब फरमाया। हजरत कासिम की शहादत का जिक्र आया तो आंखें नम हो गई। मौलाना की तकरीर के बाद घोड़ा इमाम और अलम बरामद हुए। नजमुल हुसैन, जकी अब्बास, सीटू, शान मियां, अफसर हुसैन आदि ने मर्सिया पढा। यहां से जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ देर रात्रि में समाप्त हुआ। इंतजार हुसैन जैदी, कैसर हुसैन जैदी ने जानकारी दी।