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कारगिल युद्ध के योद्धा:

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रात में लड़ी जंग, फतेह की तोलोलिंग की चोटी
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मुजफ्फरनगर। दिन में रेकी होती और रात में जंग, तोलोलिंग पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर राजपूताना रायफल्स की बटालियन ने तिरंगा फहरा दिया था। भारत मां के सपूतों के जज्बे, जोश और शौर्य के आगे पाक के बंकर तबाह हो गए। कारगिल युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिक दिनेश कुमार को अपनी यूनिट का बलिदान नहीं भूला है। वह कहते हैं कि शहीद बचन सिंह कंपनी का बहादुर और निडर लांस नायक था।
11 जून 1999 को यूनिट के ब्रिगेड कमांडर कर्नल बी रविंद्रनाथ के नेतृत्व में 2-राजपूताना रायफल्स को द्रास सेक्टर में तोलोलिंग पर चढ़ाई का आदेश मिला। उस वक्त बटालियन कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थी। दिन में व्यूह रचना बनती और रात में दुश्मनों से लड़ाई होती। कठिन स्थिति थी, क्योंकि चोटी पर बने बंकरों में बैठे पाक सैनिक और घुसपैठिए ऊपर से हमला कर रहे थे। कारगिल युद्ध के साक्षी पूर्व सैनिक दिनेश कुमार यह बताते हुए जोश में भर जाते है। बघरा ब्लाक के गांव मुकंदपुर निवासी दिनेश की सेना में पहली पोस्टिंग 10 अक्तूबर 1988 को उदयपुर में हुई थी। फिलहाल वह आदर्श कालोनी के सरस्वती विहार में रह रहे हैं। वह बताते है कि कंधों पर शस्त्र और सामान के साथ पहाड़ की चढ़ाई मुश्किल थी। रोशनी देखते ही दुश्मन फायर करते थे। मेजर विवेक गुप्ता के मार्गदर्शन में युद्ध लड़ा। बोफोर्स और आरटलरी गन से गोले बरसा कर सैनिकों को कवरिंग दी जाती थी। कारगिल की पूरी लड़ाई रात के अंधेरे में हुई। तोलोलिंग के साथ त्रिटिप्पल पर सेना ने फतेह किया। बटालियन के 18 जवान, दो जेसीओ और चार अफसर शहीद हुए।
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दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ तबाह किए थे दुश्मन के बंकर
मुजफ्फरनगर। जिस 2-राजपूताना रायफल्स ने तोलोलिंग पर भारत की जीत का इतिहास लिखा, उसमें नायक रहे ऋषिपाल सिंह की रगों में आज भी देश भक्ति का जुनून बहता है। पचेंडा के शहीद बचन सिंह उनके बहनोई थे। कुटबी गांव निवासी पूर्व सैनिक ऋषिपाल बताते हैं कि सूखे खाद्य पदार्थो से जंग में भूख मिटाई। 18 हजार फुट की ऊंचाई पर पहाड़ के दुर्गम रास्तों से चोटी पर पहुंचना कठिनाइयों से भरा था, लेकिन देश प्रेम की दिल में धधकती ज्वाला के आगे सब मुश्किलें फीकी लगती थी। लांस नायक बचन सिंह की यूनिट सबसे आगे थी। सैनिक शहादत देते गए, मगर कदम पीछे नहीं हटाए। भारत के सैन्य इतिहास में कारगिल युद्ध स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है। वर्ष 2000 में वह सेना से रिटायर्ड हुए और फिलहाल एसबीआई की गांधी कालोनी शाखा में सुरक्षा कर्मी है।
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