कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मुजफ्फरनगर और शामली के दंगा पीड़ित कैंपों में दौरे के बाद सपा में बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बयान पर शिविरार्थियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। पीड़ितों का कहना है कि नेताजी यहां आकर देखें कि चार माह से लोग किस हालत में रह रहे हैं।
अचानक कांग्रेस युवराज राहुल गांधी ने रविवार को मुजफ्फरनगर का दौरा कर सियासत में हलचल मचा दी है। राहुल के कदम पर मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का बयान चौंकाने वाला है। नेताजी ने कहा है कि पुनर्वास मुआवजा दिए जाने के बावजूद शिविरों में फिलहाल जो लोग रह रहे हैं, उनमें अधिकांश कांग्रेस और भाजपा के आदमी हैं।
नेताजी के बयान पर हंगामा खड़ा हो गया है। लोई, बसी कलां, जौला आदि गांवों के शिविरों में ठहरे तीन हजार से ज्यादा पीड़ितों में गुस्सा है। पुनर्वास मुआवजे का सही वितरण नहीं किए जाने और गांव में सुरक्षा का माहौल नहीं मिलने के सवालों पर कई गांवों के पीड़ित शिविरों में हैं, इनमें अधिक संख्या फुगाना के लोगों की है।
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बढ़ी सर्दी के बावजूद कैपों में आसरा लिए पीड़ितों का कहना है कि दंगे के बाद से आज तक सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह मुजफ्फरनगर नहीं आए। लखनऊ और दिल्ली में बैठकर पीड़ितों की सच्चाई पता नहीं चलेगी। नेताजी को कैंपों में आकर हकीकत देखनी चाहिए।
मुलायम सिंह का बयान निंदनीय है। कैंपों की दयनीय हालत और समस्याओं को देखकर ही नेताजी को पता चलता कि पीड़ितों का क्या हाल है। सरकार समस्याओं का निदान करने के बजाय दंगा पीड़ितों का दर्द और बढ़ा रही है। पीड़ितों का हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
राव जब्बार अहमद, अध्यक्ष इंतजामिया कमेटी, लोई कैंप
नेताजी के बयान से मुस्लिमों को आघात पहुंचा है। मुसलिमों के हमदर्द बनने वाली सपा सरकार को दंगा पीड़ितों को कांग्रेस और भाजपा के लोग बताना शर्मनाक है। हिंसा का दर्द झेलने वालों के लिए इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। हिंसाग्रस्त गांवों में सरकार अभी तक सुरक्षा का माहौल नहीं बना पाई है।
अब्दुल जब्बार, अध्यक्ष इंतजामिया कमेटी, जौला कैंप