मुरादाबाद। इंटर पास करने वाले जिले के छात्र-छात्राएं अब परंपरागत डिग्री में प्रवेश न लेकर रोजगारपरक कोर्सों की ओर रुख कर रहे हैं। परंपरागत डिग्री जैसे बीए और बीएससी करने वाले विद्यार्थियों के लिए कम होते नाैकरी के अवसर इसका बड़ा कारण हैं। सरकार भी कोई ऐसी पहल नहीं कर रही है, जिससे युवाओं का परंपरागत डिग्री के प्रति रुझान बढ़े। इसके बजाय युवा बीएससी नर्सिंग, बीटेक इन एआई जैसे कोर्स चुन रहे हैं।
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जिले के 87 महाविद्यालय संबद्ध हैं। जिले में हर साल करीब 40 हजार छात्र-छात्राएं 12वीं की परीक्षा पास करते हैं। विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक में प्रवेश के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन महाविद्यालयों में परंपरागत डिग्री में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राएं रुचि नहीं दिखा रहे हैं। महाविद्यालयों में अभी तक 60 प्रतिशत सीटों पर ही विद्यार्थियों ने पंजीकरण नहीं कराया है। स्नातक में पंजीकरण की तारीख दूसरी बार बढ़ाई गई है।
जिले के तमाम महाविद्यालयों के प्रोफेसर का कहना है कि स्नातक में छात्रों के कम दाखिला होने की समस्या पिछले चार साल से बनी हुई है। परंपरागत कोर्स जैसे बीए और बीएससी में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं का रुझान कम हो रहा है। अब 12वीं की परीक्षा पास करने वाले आधे से ज्यादा छात्र नर्सिंग, पैरामेडिकल, बीटेक इन एआई समेत अन्य रोजगारपरक कोर्स में दाखिला ले रहे हैं। कुछ छात्र पुलिस, आर्मी समेत अन्य विभाग में नौकरी के लिए तैयारी करने करते हैं।
महाराजा हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, केजीके कॉलेज, दयानंद आर्य कन्या पीजी कॉलेज समेत अन्य महाविद्यालयों के प्रोफेसर का कहना है कि परंपरागत कोर्स करने वाले छात्र-छत्राओं के लिए नौकरी न के बराबर हैं। सरकार की ओर से भी इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इससे बीए और बीएससी करने के प्रति छात्र-छात्राओं में निराशा बनी हुई है। परंपरागत डिग्रियां लेने के बाद युवाओं को नाैकरी के लिए भटकना पड़ रहा है। अगर यही स्थिति रही तो धीरे-धीरे इन डिग्रियों के विद्यार्थियों की संख्या खत्म हो जाएगी।
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63 हजार छात्र-छात्राओं ने स्नातक में कराया पंजीकरण
विवि से संबद्ध मंडल में 372 महाविद्यालय हैं। इनमें सीटों की संख्या करीब 1.40 लाख है, लेकिन अभी तक मंडल के महाविद्यालयों में केवल 63 हजार छात्र-छात्राओं ने स्नातक में प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया है।
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- परंपरागत डिग्री अब छात्र-छात्राओं के लिए औपचारिकता बनकर रह गई है। बीए, बीएससी में घटती छात्र-छात्राओं की संख्या महाविद्यालय को प्रभावित करेगी। - प्रो. अनिल कुमार, संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गुरु जंभेश्वर विवि
- इसी तरीके से महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या घटेगी तो एक दिन कई महाविद्यालय बंद हो जाएंगे। शिक्षकों की संख्या घटा दी जाएगी। - डॉ. अय्यूब, अध्यक्ष, एमएच काॅलेज शिक्षक संघ, मुरादाबाद
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विद्यार्थी बोले- नाैकरी प्राथमिकता
- वर्तमान में एआई का क्रेज है। एआई से बीटेक करने पर जल्द ही रोजगार मिल जाएगा। नाैकरी सभी की प्राथमिकता है। इसलिए साइंस से इंटर करने के बाद बीएससी न करके बीटेक का कोर्स चुना। - अयाम गुप्ता, बीटेक छात्र
- नर्सिंग का कोर्स करने से 20 से 25 हजार की नौकरी मिल ही जाती है, लेकिन बीए या बीएससी करने से नौकरी के लिए काफी परेशानी होती है। इसलिए बीएससी न करके बीएससी नर्सिंग का कोर्स कर रही हूं। - पावनी अग्रवाल, बीएससी नर्सिंग छात्रा