मतदान के बाद युवा
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पहली बार वोट देने वाले युवा इशारों की भाषा बोल रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय मुफ्ती टोला में पहली बार वोट देने पहुंचे अंकित, विशाल और रविंद्र का कहना है कि मुरादाबाद में डिग्री कॉलेज तो थे लेकिन सरकारी विश्वविद्यालय नहीं था। इसके कारण रविंद्र को स्नातक में प्रवेश के लिए फार्म में खामी होने पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने पड़े थे। मुरादाबाद में सरकारी विश्वविद्यालय बनने से कई युवाओं को सहूलियत होगी।