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UP: वर्दी पहन पिता का सपना किया पूरा, भाई-बहन साथ बने दरोगा, जानें यूपी की इन बेटियों की सक्सेस स्टोरी

Sat, 09 Mar 2024 06:42 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
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मुरादाबाद में ट्रेनिंग के दौरान महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

मुरादाबाद के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में इन दिनों 889 महिला दरोगा प्रशिक्षण ले रहीं हैं। एक हफ्ते बाद पासिंग आउट परेड होने पर सभी प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में पुलिसिंग का हिस्सा बन जाएंगी। प्रशिक्षण के दौरान सभी को अपराध से जुड़ी पढ़ाई के साथ हथियारों की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। 

 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

शिवानी ने दरोगा बनकर पूरा किया पिता का सपना 

गाजियाबाद की शिवानी तंवर एनसीसी कैडेट हैं। वह राजनीतिशास्त्र में एमए हैं। उनके पिता अनिल तंवर दिल्ली जल बोर्ड में कार्यरत हैं। भाई अभिषेक तंवर सीए हैं। जबकि एक बहन कामिनी तंवर टीचर हैं। मां कमलेश हैं। पिता और परिवार के सभी सदस्यों का सपना था कि शिवानी दरोगा बने। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। परिणामस्वरूप शिवानी दरोगा बन गईं।

पिता से मिली प्रेरणा

मेरे पिता विजय कुमार सिंह चौहान गाजियाबाद में मुख्य आरक्षी पद पर तैनात हैं। मैंने हमेशा उन्हें लोगों की मदद करते हुए देखा तो मुझे भी पुलिस में आने की प्रेरणा मिली। मैंने स्वाध्याय से यह परीक्षा उत्तीर्ण की। मेरा मानना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। जरूरत सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति की है। मुझे वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों को देखकर बुरा लगता है। इसलिए मैं उनके लिए काम करना चाहती हूं। माता-पिता को छोड़ने वाले बच्चों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। -आकांक्षा चौहान, गाजियाबाद

 
 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

सिविल सर्विसेज में जाना है सपना

सिविल सर्विसेज में जाना मेरा सपना है। मैं अपने परिवार में सबसे बड़ी हूं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। इसलिए मैं चाहती थी कि पहले पुलिस में ही कांस्टेबल या सब इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हो जाऊं, ताकि मेरी तैयारी में होने वाले खर्चे का बोझ परिवार पर न पड़े। मेरा मानना है कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की साक्षरता की दर कम है। बेटियाें को पढ़ाई का माहौल मिल सके, इसके लिए मैं गांव में पुस्तकालय खोलना चाहती हूं। -अनीता यादव, गाजीपुर

सरकारी स्कूल में की पढ़ाई

मैंने सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है। इसके बाद आसपड़ोस के लोग सिर्फ मेरी शादी करवाने की ही बात करते थे, लेकिन मुझे सिविल सर्विसेज में जाना है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और मेरे सपने बड़े हैं। इसलिए पहले मैंने रेलवे की नौकरी की और अब यूपी एसआई का प्रशिक्षण ले रही हूं। दो बार सिविल सर्विस का साक्षात्कार दे चुकी हैं, लेकिन अंतिम मेरिट में रह जाती हूं। मैं भीख मांगने वाले बच्चों के उत्थान के लिए काम करना चाहती हूं। उनको पढ़ाना बहुत जरूरी है। -अलका कुमारी, पटना बिहार

 
 
 

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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

युवाओं को कराती हूं कोचिंग

मैंने डीएलएड किया है। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाती थी। मेरा एक साथ दो जगह रेलवे एनटीपीसी और यूपी एसआई पद पर चयन हुआ था। मुझे समाज के लिए कार्य करना था, इसलिए मैंने एसआई की नौकरी ज्वाइन की। मुझे भीख मांगने वाले बच्चे और खासकर मानसिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए कार्य करना है। इस तबके के बच्चे व बेटियों को शिक्षा दिलवाना जरूरी है, इसलिए समय निकालकर दो घंटे पढ़ाया करूंगी। - दीपाली रुहेला, मुजफ्फरनगर

अफसर बनना चाहती हैं प्रीति चौहान 

प्रीति चौहान के पिता राजेंद्र सिंह दवा व्यापारी हैं। प्रीति का एक भाई अंकित चौहान कांस्टेबल है। प्रीति एमए व बीएड हैं। उनकी तैयारी अभी जारी है। वह चाहती हैं कि पीसीएस अफसर बन जाएं। तैनाती के दौरान भी वह अपनी तैयारी जारी रखेंगी।

 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

हो गया था कोरोना, नहीं छोड़ा मदद करना

कुशीनगर निवासी रीना बताती हैं कि मैं एनसीसी कैडेट थी। पुलिस में आना मेरी पहली पसंद थी। मेरी पहली नियुक्ति कांस्टेबल के रूप में हुई थी। संक्रमण काल में मैं कोरोना संक्रमित हो गई थी। लेकिन मैंने बिना अपनी चिंता किए लोगों को राशन तक पहुंचाने में मदद की थी। 

सुबह 4 बजे उठकर दौड़ती थीं मनीषा 

प्रयागराज निवासी मनीषा पटेल का कहना है कि उनके पिता भाग्य सिंह किसान हैं। उनकी मां चंदा श्री का सपना था कि बेटी पुलिस विभाग में अधिकारी बने। मां का सपना पूरा करने के लिए मनीषा रोजाना सुबह 4 बजे उठती थीं और छोटे भाई को साथ लेकर गांव की कच्ची सड़क पर दौड़ लगाती थीं। 2018 में बीएससी के बाद मनीषा ने मेहनत दोगुनी कर दी और वह यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में पास हो गईं।

 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

चाचा से प्रेरणा लेकर पुलिस में भर्ती हुईं काजोल 

उन्नाव के चक्रवंशी गांव की रहने वाली काजोल सिंह के पिता कौशल किशोर किसान हैं। काजोल ने बीएससी व बीएड किया है। चाचा यूपी पुलिस में सब  इंस्पेक्टर हैं। चाचा से आपराधिक मामलों के खुलासे सुनकर बहुत अच्छा लगता था। चाचा से प्रेरणा लेकर उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती की तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत से पहले प्रयास में ही सफलता मिल गई।

सिपाही से दरोगा बनीं शालिनी 

हापुड़ पिलुखआ निवासी शालिनी के पिता संजय कुमार किसान हैं। शालिनी ने एमएससी मैथ के अलावा बीएड किया है। 2020 में वह यूपी में सिपाही के पद तैनात हो गईं थीं। बरेली में उनकी तैनाती थी। लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। सब इंस्पेक्टर के लिए उनका चयन हुआ तो सिपाही पद से त्यागपत्र दे दिया। शालिनी अभी और आगे बढ़ना चाहती हैं इसके लिए वह पढ़ाई जारी रखेंगी। 

 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

पिता को वर्दी में देख जागा पुलिस में जाने का सपना 

मेरठ निवासी अनु कुमारी पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उनके पिता नौ सिंह आर्मी में हैं। अनु कुमारी का कहना है कि पिता को वर्दी में देखकर ही पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा में जाने का सपना देख लिया था। अब भी अपनी तैयारी जारी रखेंगी और पीसीएस बनेंगी।

पहले ही प्रयास में सीमा राठी को मिली सफलता 

मुजफ्फरनगर की सीमा राठी ने बताया कि उन्हें पहले प्रयास में ही दरोगा पद पर चयन हो गया था। उनका कहना है कि ट्रेनिंग में आने से पहले उन्हें लगता था कि ट्रेनिंग कैसे पूरी होगी। इसके बाद भी वह अपनी तैयारी जारी रखेंगी। पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर वह डीएसपी बनना चाहती हैं।

 
 
 

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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

सुचिता साहू बनना चाहती हैं डीएसपी 

फतेहपुर निवासी सुचिता साहू के पिता राकेश साहू व्यापारी हैं। सुचिता ने मैथ से बीएससी की है। दरोगा पद के लिए चयन होने से पहले वह यूपी पुलिस में सिपाही थीं। मिर्जापुर में उनकी तैनाती थी। कुछ दिन में वह पासआउट हो जाएंगी। उनका कहना है कि उनके परिवार का सपना है कि बेटी डीएसपी बने। इसके  लिए वह अपनी तैयारी जारी रखेंगी। पीसीएस अफसर बनकर वह अपने परिवार का सपना पूरा करना चाहती हैं।

पिता की प्रेरणा से भाई-बहन साथ बने दरोगा  

शामली निवासी शिवानी पवार का कहना है कि उनके पिता मनोज कुमार किसान हैं और बेहद संघर्ष से उन्होंने बच्चों को पढ़ाया है। शिवानी और उनके भाई रजत पवार ने पिता के सपने को समझा और उसे साकार करने में जुट गए। दोनों ने पुलिस में भर्ती होने के लिए साथ पढ़ाई की और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। आज दोनों भाई-बहन एक वर्ष का कठिन प्रशिक्षण पूरा करके दरोगा बनने जा रहे हैं। भाई रजत उन्नाव में प्रशिक्षण ले रहे हैं। 

 
 
 
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मुरादाबाद पुलिस स्कूल में ट्रेनिंग लेतीं महिला दरोगा - फोटो : अमर उजाला

दस किमी रोज दौड़ीं, आठ घंटे पढ़ाई से सफलता पाई 

लखीमपुर खीरी निवासी महेश्वरी बीए पास हैं। उनके पिता जगदीश किसान हैं। दो भाई गौतम और अभिनव कुमार पढ़ाई कर रहे हैं। महेश्वरी का कहना है कि उन्होंने दरोगा बनने के लिए रोज दस किलोमीटर दौड़ लगाई थी। इसके अलावा वह आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। इसके दम पर वह सफल होने में कामयाब हो पाई हैं। पासआउट होने के बाद जिस जिले या थाने में तैनाती रहेगी। वह वहां ऐसा माहौल तैयार करेंगी कि पीड़ित अपनी बात बेझिझक कह सकें। 

 
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