अपहरण के बाद छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को न्यायालय ने दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों आरोपी जमानत पर बाहर थे। फैसला आने के बाद कस्टडी में लेकर जेल भेजा गया है।
ये घटना नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव में हुई थी। यहां पर एक ग्रामीण का परिवार रहता है। उसकी 15 वर्षीय बेटी कक्षा 9 में पढ़ती थी। 28 जनवरी 2008 की सुबह करीब 11 बजे दूसरे वर्ग के यूसुफ और फरीदू ने छात्रा का अपहरण कर लिया था। इस मामले में यूसुफ, फरीदू और एक नाबालिग के खिलाफ छात्रा के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने हरिद्वार से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर छात्राओं को बरामद कर लिया था। पुलिस की पूछताछ के दौरान छात्रा ने आरोपियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। लिहाजा पुलिस ने मुकदमे में दुष्कर्म की धारा बढ़ाकर आरोपियों को जेल भेज दिया था। फिलहाल तीनों आरोपी जमानत पर जेल से बाहर थे।
यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित निशांत शैव्य की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। जेल से छूटने के बाद आरोपियों ने दो बार पीड़ित परिवार पर फैसले का दबाव बनाया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित किसान ने दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने पैरवी की। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी रईस और फरीदू को दोषी करार दिया। दोष सिद्ध होने की जानकारी मिलते ही दोषियों के परिजनों फिर पीड़िता के घर पर हमला बोल दिया था। सोमवार को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में एक आरोपी नाबालिग है, जिसकी पत्रावली संबंधित कोर्ट में विचाराधीन चल रही है।