मुरादाबाद। जिले में ई-रिक्शाओं की बढ़ती संख्या और जोन व्यवस्था के धरातल पर न होने से यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। पिछले छह माह में करीब छह हजार नई ई-रिक्शाएं
सड़कों पर उतरने के बावजूद उनके संचालन को नियंत्रित करने के लिए दो साल पहले बनाए गए पांच जोन कागजों तक सीमित हैं। हालात यह हैं कि शहर के प्रमुख बाजारों में ई-रिक्शाओं का दबाव बढ़ गया है, जिससे जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसकी वजह से व्यापारियों और ग्राहकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आरटीओ विभाग के अनुसार, जिले में 22 हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। बीते छह माह में ही करीब छह हजार ई-रिक्शाओं का पंजीकरण हुआ है। लेकिन इन ई-रिक्शाओं के संचालन की व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकी है। यातायात पुलिस ने दो साल पहले शहर को पांच जोन में बांटकर ई-रिक्शाओं के संचालन की योजना तैयार की थी, ताकि हर एक ई-रिक्शा निर्धारित क्षेत्र में ही संचालित हो और बाजारों पर दबाव कम किया जा सके। यह व्यवस्था कभी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई। बर्तन बाजार के व्यापारियों का कहना है कि दिवाली के त्योहार पर जोन सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन यह व्यवस्था केवल तीन दिन ही चल सकी। इसके बाद फिर से ई-रिक्शाओं का संचालन पुराने ढर्रे पर लौट आया। अधिकांश ई-रिक्शाओं का संचालन बुध बाजार, अमरोहा गेट, मंडी चौक, टाउन हॉल, स्टेशन रोड, इंपीरियल तिराहा, बुध बाजार, चौमुखापुल, जीएमडी रोड, गंज बाजार में किया जाता है।
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व्यापारी बोले...
-अधिकारियों के साथ बैठक होती है। ई-रिक्शाओं के संचालन संबंधी बातचीत होती है। लेकिन जोन व्यवस्था लागू करने का कोई हल नहीं निकलता है। जोन के हिसाब से ई-रिक्शाओं का संचालन कब किया जाएगा। इसका किसी को पता नहीं हैं। ई-रिक्शाओं की वजह से शहर में काफी जाम रहता है।- टोनी सहगल, व्यापारी
-ई-रिक्शाओं के लिए जोन व्यवस्था लागू करने के लिए त्योहार के समय प्रशासन के साथ कई बार बैठक हुई। लेकिन आज तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। बाजारों में ई-रिक्शाओं से जाम लगता है। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में बाजार में ग्राहक बिल्कुल भी आना पसंद नहीं करेंगे।-सुधीर कंसल, व्यापारी
-बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। हजारों की संख्या में ई-रिक्शाओं के आने से बाजारों में आने-जाने के लिए जगह नहीं बचती है। बाजार में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने और वहां से निकलने में काफी समय लग जाता है, जिसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा है।-अरविंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार मंडल
-दीवाली पर जोन व्यवस्था लागू की गई थी। यह व्यवस्था तीन दिन भी नहीं चल सकी। हर बार अधिकारियों के साथ बैठक होती है और जोन व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया जाता है। ई-रिक्शाओं के संचालन संबंधी जो भी निर्णय होता है उस पर अमल नहीं किया जाता। इसलिए बाजार में ई-रिक्शाओं का दिनभर जाम रहता है।-विपिन गुप्ता, प्रदेश महामंत्री, संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश