मुरादाबाद। प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण कांठ रोड पर महानगर का दर्जा मिलने के दौरान गांव सेशहर बने मऊ की तस्वीर ढाई दशक बाद भी नहीं बदल सकी है। गांव के प्रवेशद्वार पर सड़क के दोनों ओर बने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के गेट पर कूड़े का अंबार लगा है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं से स्कूल के आसपास पानी जमा होने से विद्यार्थियों को आवागमन के दौरान परेशानी होती है। शहर के विस्तार के साथ ही लोगों में एक आशा की किरण जगी थी कि अब क्षेत्र में विकास कार्यों को पंख लगेंगे। हालांकि मऊ में सड़क, शिक्षा, चिकित्सा, डाक सेवा आदि के हालात जस-जस के तस होने के कारण लोगों की उम्मीदें धूमिल हो गई है।
साढ़े छह हजार से अधिक मतदाताओं वाले मोहल्ला मऊ में करीब 20 हजार की आबादी निवास करती है। बीच में रेलवे लाइन होने के कारण मोहल्ला दो भागों में बंटा है। कांठ रोड से सटी आबादी वाले क्षेत्र से रेलवे लाइन तक कुछ समय पहले सीसी रोड बन गई है।
रेलवे लाइन के आगे के मोहल्लों में पक्की सड़क नाम की चीज दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। मोहल्ले के लोगों से लेकर पार्षद तक ने समय-समय पर विकास की मांग की, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। मोहल्ले के लोगों को बिजली का बिल जमा करने और डाकघर जाने के लिए उन्हें चार से दस किमी तक की दूरी तय करनी पड़ती है। रेलवे लाइन के दूसरी तरफ नई बसी कॉलोनी कुछ नीचे स्थान पर है, जिससे बरसात के दिनों में रास्तों पर कमर तक पानी भर जाता है। इससे बचाव के लिए न तो यहां सड़क का निर्माण किया गया और न ही जलनिकासी की कोई व्यवस्था का।
पिछले दस साल से मोहल्ले की सड़क को पक्का करने की मांग कर रहे हैं। न पार्षद सुनती हैं न निगम के अधिकारी। बरसात में मोहल्ले का बुरा हाल हो जाता है। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से कॉलोनी के मार्गों पर कमर तक पानी भर जाता है। मुख्य मार्ग रेलवे क्रासिंग से करीब तीन सौ मीटर दूर होने के कारण जलभराव के कारण लोग अपनी जरूरत का सामान भी लेने बाजार तक नहीं जा पाते।
- शहाना
मोहल्ले में शहर जैसी कोई सुविधा नहीं है। हालात गांव से भी बदतर हो गए हैं। डाकखाने की सुविधा के लिए तीन किमी दूर हरथला रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है। कक्षा आठ से आगे की पढ़ाई करने के लिए बच्चों को करीब छह किमी दूर पीली कोठी भेजना पड़ता है। सुविधाओं के नाम पर सिर्फ पाइप लाइन बिछाई गई है। वह भी जगह-जगह से लीक है, जिससे गंदा पानी आता है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
- ऊषा देवी
करीब 20 हजार की आबादी वाले इस मोहल्ले में एक अदद पार्क तक की सुविधा नहीं है। बिजली के पोल तो मोहल्ले में लगे हैं, लेकिन किसी भी बिजली पोल पर पथ प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। रास्ते कच्चे व ऊबड़-खाबड़ हैं। इसके चलते रात में कई लोग गिर कर चोटिल हो चुके हैं। पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों से कई बार मोहल्ले के लोग मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनता नहीं। ढाई दशक बाद भी हालात जस के तस हैं।
- शाहिद हुसैन
पहले मोहल्ले में जगह-जगह कूड़े के लिए डस्टबिन रखीं थीं। नगर निगम ने उन सभी डस्टबिनों को यह कहते हुए हटवा लिया कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाड़ी आएगी, लेकिन निगम की वह व्यवस्था भी लगभग ठप है। इसके कारण तमाम लोग अपना कूड़ा मजबूरन खाली पड़े प्लाटों व सड़क के किनारे डालने को मजबूर हैं। सफाई अभाव में चोक नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है।
मैं समय-समय पर बोर्ड की बैठक में विकास कार्यों की मांग करती रहती हूं, लेकिन कभी बजट का अभाव का बहाना बना दिया जाता है तो कभी अन्य दिक्कतें बता दी जाती हैं। मैं निर्दलीय पार्षद चुनी गई हूं। इसलिए भी मेरी कम ही सुनी जाती है। मेरे वार्ड के मोहल्ला मऊ में पिछले ढाई दशक में नहीं के बराबर विकास कार्य हुआ है। लाइनपार में बसी नई आबादी के समक्ष रास्ते की समस्या है। पेयजल पाइप लाइन भी जगह-जगह से लीक है। स्ट्रीट लाइटों का भी वार्ड में अभाव है। जागरूकता की कमी व निगम कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गांव में गंदगी की समस्या बनी रहती है।
- माया देवी, पार्षद वार्ड-15