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अमर उजाला अभियान: कोरोना काल में बिगड़ गई विद्यार्थियों की लिखावट, एक पीरियड में सिखा रहे अक्षरों की बनावट

Wed, 23 Mar 2022 02:09 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद

सार

स्कूलों में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग और शारीरिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है। विद्यार्थियों को एक-दूसरे से सामान साझा नहीं करने के लिए जागरूक किया गया है। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी शिक्षण सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
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नोसगे स्कूल में जांच करती महिला । संवाद - फोटो : CITY
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की तीन लहरों के बाद स्कूल कोविड प्रोटोकॉल के नियमों का पालन करते हुए खुल गए हैं। हालांकि दो वर्षों में प्रभावित हुए शिक्षण को सुधारना स्कूल प्रधानाचार्यों के लिए एक चुनौती बन गया है। कोरोना काल में बिगड़ गई विद्यार्थियों की लिखावट को सुधारने में शिक्षकों को काफी समय देना पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए स्कूलों ने अतिरिक्त क्लास संचालन की योजना बनाई है।

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इसके अलावा अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी शिक्षण सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग और शारीरिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है। विद्यार्थियों को एक-दूसरे से सामान साझा नहीं करने के लिए जागरूक किया गया है।

कुर्सी-मेज के साथ खिड़कियों पर भी कर रहे थे सैनिटाइजेशन

बोनी एनी पब्लिक स्कूल में नया सत्र शुरू हो गया है। मंगलवार को नर्सरी से पांच तक के विद्यार्थी पढ़ने के लिए आए थे, जबकि बुधवार को कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थी आए। कोविड प्रोटोकॉल की वजह से विद्यालय में सेक्शन की संख्या में बढ़ोतरी कर दी गई है। एक कमरे में 45 विद्यार्थियों के स्थान पर अब 30 से कम संख्या कर दी गई है। दोपहर डेढ़ बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद विद्यालय में कर्मचारियों द्वारा सैनिटाइजेशन किया जा रहा था।

प्रिंसिपल सुनीता भटनागर ने बताया कि विद्यार्थियों की 70 फीसदी उपस्थिति है। 20 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके माता-पिता यहां नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण में रोजगार प्रभावित होने की वजह से वह विद्यार्थी अपने घरों को लौट गए हैं। वहीं, 10 विद्यार्थियों ने अपने परिजनों को कोरोना की वजह से खोया है। कई विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से हट गया है और वह हर समय अपने परिजनों को याद करते हैं। इसलिए शिक्षकों द्वारा उनकी काउंसिलिंग कर पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जुलाई माह तक नए के साथ पुराने पाठ्यक्रम को पढ़ाया जाएगा, ताकि पढ़ाई का तारतम्य बना रहे। सुलेख का अभ्यास करवाया जा रहा है।
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सुलेख के लिए निर्धारित किया एक पीरियड

पुलिस मॉर्डन स्कूल में थर्मल स्क्रीनिंग में सैनिटाइजेशन और मेडिकल रूम की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों की उपस्थिति भी पूरी है। प्रिंसिपल ज्योति सिंह ने बताया कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा लिखने की आदत प्रभावित हुई है। इसे सुधारने के लिए 30 मिनट का एक पीरियड सुलेख के लिए निर्धारित कर दिया है। इसमें 15 मिनट हिंदी और 15 मिनट अंग्रेजी विषय में से विद्यार्थियों को लिखना होता है।

लगातार ऑनलाइन पढ़ाई के कारण करीब 30 फीसदी विद्यार्थियों का किताबों को पढ़ने में मन नहीं लग रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों की काउंसिलिंग की जा रही है। दो राउंड काउंसलिंग हो चुकी है। अब अगले महीने बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की एक बार और काउंसलिंग की जाएगी। इसके अलावा विद्यालय में रेमेडियकल क्लास का भी संचालन किया जा रहा है।

विद्यार्थियों का यह है कहना...

स्कूल में सैनिटाइजेशन करवाया जाता है। इसके अलावा हम खुद भी थोड़ी-थोड़ी देर बाद हाथों को सैनिटाइज करते रहते हैं। अब यह हमारी आदत बन गया है।
- अल आफिया, छात्रा।

मुरादाबाद में कोरोना का सिर्फ एक ही सक्रिय केस है, जो हमारे लिए राहत देने वाली बात है। शिक्षक स्कूल में ही नहीं, बल्कि घर पर और बाहर कहीं जाते समय भी कोविड प्रोटोकाल के पालन को प्रोत्साहित करते हैं।
- रिदा शरीफ, छात्रा।

विद्यालय में सभी विद्यार्थियों को स्वस्थ रखने के लिए टीकाकरण करवाया गया है। इसके अलावा पौष्टिक भोजन और नियमित एक्सरसाइज करने के लिए शिक्षक कहते हैं, जिससे हम स्वस्थ रहें।
- शौर्य सिंह, छात्र।

ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की परेशानी की वजह से कुछ चैप्टर अच्छे से समझ में नहीं आए थे। स्कूल खुलने पर हमने पहले शिक्षकों से उन टॉपिक को समझा। नए सत्र में भी पुराने पाठ्यक्रम को पढ़ाया जा रहा है।
- फरीबा शरीफ, छात्रा।

यह बोले अभिभावक...

बच्चे जितना स्कूल में रहकर सीखते हैं, घर पर रहकर नहीं सीख पाते हैं। बार-बार कहने पर भी पढ़ाई के प्रति उनके मन में उत्साह नहीं था। इस बात का संतुष्टि है कि अब वार्षिक परीक्षा ऑफलाइन देने के कारण वह अपनी मेहनत से पास होंगे।
- रीना विश्नोई, अभिभावक।

ऑनलाइन पढ़ाई एक विकल्प थी, जो कि आफलाइन पढ़ाई का स्थान नहीं ले सकती है। स्कूल में बच्चे किताबों के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी सीखते हैं। दूसरे बच्चों ने उन्हें नई चीजें सीखने को मिलती हैं। दो वर्ष लगातार घर में रहने की वजह से वह चिड़चिड़े हो गए थे। स्कूल पर भरोसा है कि शिक्षक बच्चों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखेंगे।
- सोनिया, अभिभावक।

दो विद्यार्थियों को उनके रिश्तेदार पढ़ा रहे थे। कोरोना के कारण रिश्तेदारों का निधन होने पर विद्यार्थी परेशान हो गए थे। इसके कारण कई विद्यार्थी ऑनलाइन क्लास में अनुपस्थित थे, लेकिन स्कूल द्वारा प्रोत्साहित करने के बाद अब वह नियमित स्कूल आ रही हैं। छात्र-छात्राएं दोनों पढ़ने में मेधावी हैं। बालक और बालिकाओं की उपस्थिति के अनुपात में अंतर नहीं है। अभिभावकों के रोजगार प्रभावित होना, परिजनों का कोरोना पीड़ित होने पर मेडिकल पर ज्यादा खर्च होना भी पढ़ाई को प्रभावित करना कारण माना जा रहा है।
- नीरज गुप्ता, सचिव, मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स।
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