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स्कूल खोलने के लिए शिक्षक तैयार, बच्चों को भेजने से अभिभावकों का इनकार

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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण की स्थितियां नियंत्रण में आने के साथ ही सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों और कालेजों को खोलने के निर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों का पालन करने के लिए मुरादाबाद के स्कूल संचालक तैयार हैं। हालांकि कालेजों में परीक्षाएं और प्रवेश प्रक्रिया संचालित होने की वजह से कालेज प्रशासन कक्षाओं के संचालन को चुनौती मान रहा है। वहीं, बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि तीसरी लहर की आशंका बनी हुई है और बच्चों का टीकाकरण भी नहीं हुआ है। ऐसे में स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम हो सकता है।
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अभी हमारे यहां सभी शिक्षिकाएं कालेज की वार्षिक परीक्षाओं को कराने में व्यस्त हैं। इसके बाद नए शैक्षिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू करनी है। ऐसे में अभी कक्षाओं के संचालन में मुश्किलें आएंगी, लेकिन हम प्रयास करेंगे कि सरकार के निर्देश का पालन करवाया जा सके।
- डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा, प्राचार्य, दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय
अभी कालेजों में वार्षिक परीक्षाएं संचालित की जा रही हैं। करीब 16 अगस्त से प्रयोगात्मक परीक्षाओं को कराने के साथ उनके अंक अपलोड करने की कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद स्नातक प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया भी संचालित करनी है। स्नातक प्रथम वर्ष में प्रोन्नत किए गए और स्नातक द्वितीय वर्ष में परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों के परिणाम के बाद उनके भी प्रवेश किए जाएंगे। ऐसे में अब कक्षाओं का संचालन किस तरह से किया जाएगा, इस पर विचार करेंगे।
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- डॉ. अंजना दास, प्राचार्य, गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कालेज
समय एक बड़ा मुद्दा है। पहली पाली सुबह आठ बजे से 11 बजे तक और दूसरी पाली सुबह 11:30 बजे से दोपहर ढ़ाई बजे तक होती तो ज्यादा बेहतर होता, क्योंकि कई महिला शिक्षकों के घर में उनके छोटे बच्चे हैं। बाकी कोविड 19 प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवस्था की गई है। सरकार के आदेश का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
- हेमंत झा, प्रधानाचार्य, आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल
सरकार द्वारा स्कूल खोले जाने का निर्णय सराहनीय है, क्योंकि कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों की रुचि व लगन काफी कमजोर हो गई है। सीबीएसई ने अपडेट पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। अब बच्चों में निश्चित रूप से चेतना जागेगी। स्कूलों का समय थोड़ा ज्यादा होने से उन शिक्षिकाओं को दिक्कत हो सकती है, जिनके घर में छोटे बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति हैं।
- नीरज कुमार गुप्ता, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स
यह बोले अभिभावक :
अभी मैं अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजूंगा, क्योंकि अभी तक बच्चों को वैक्सीन की डोज नहीं दी गई है। कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका है। बच्चों के स्वास्थ्य को जोखिम में डालना सही नहीं है।
- पंकज, अभिभावक
मैं सरकार के फैसले से सहमत नहीं हूं। जब तक बच्चों को टीका नहीं लगाया जाता है, तब तक माध्यमिक के स्कूलों को नहीं खोला जाना चाहिए। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। इसलिए उनके संक्रमित होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।
- पुनीत अनेजा, अभिभावक
इतनी जल्दबाजी में स्कूल खोलना अभी सही नहीं है। हम मानते हैं कि स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हो रहा है, लेकिन अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं। पढ़ाई से ज्यादा हमारे लिए अपने बच्चों की सेहत है।
- कौशल सक्सेना, अभिभावक
तीसरी लहर बच्चों के लिहाज से बहुत खतरनाक होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसे में यदि हम अपने बच्चों को स्कूल भेज दें और उन्हें संक्रमण हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। कोई भी स्कूल संचालक जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं तो हम क्यों अपने बच्चों की जान जोखिम में डालें।
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- सोमा रस्तोगी, अभिभावक
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