मुरादाबाद। पाकबड़ा के चर्चित शिक्षक अशोक चौधरी हत्याकांड का सच अब लोगों के सामने नहीं आएगा। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में जांच पड़ताल के नाम पर खानापूर्ति कर चुपके से एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी। हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी परिवार को आश्वासन देते रहे कि केस की जांच जारी है। न्याय की आस में दर-दर भटक रहे परिवार को ये तक नहीं बताया गया कि पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अब केस को खत्म किया जा रहा है।
पाकबड़ा थानाक्षेत्र के गुरैठा गांव निवासी अशोक चौधरी बिलारी स्थित आईटीआई कालेज में शिक्षक थे। तीन अगस्त 2020 की रात वह पाकबड़ा में दिल्ली रोड स्थित ढाबे से खाना खाने के बाद अपने घर लौट रहे थे। अगले दिन चार अगस्त की सुबह वह खून से लथपथ हालत में पाकबड़ा-कैलसा रोड स्थित ईंट भट्ठे की कोठरी में पड़े मिले थे। उनकी बाइक भी कुछ ही दूरी पर स्टैंड पर खड़ी थी, जबकि तख्त पर मोबाइल रखा मिला था। लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल अशोक कुमार को वहां से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था। सूचना मिलने पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए थे। आठ अगस्त 2020 को उपचार के दौरान शिक्षक की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने के बाद जांच शुरू की थी। परिवार का दावा है कि पुलिस ने संदिग्ध लोगों को उठाकर पूछताछ भी की थी। पुलिस खुलासे के नजदीक पहुंचने वाली थी कि अचानक एक पुलिस अफसर और भाजपा नेता का नाम सामने आने के बाद पुलिस के कदम ठिठक गए थे। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिए लोगों को अचानक क्लीन चिट देकर छोड़ दिया। अब पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में चुपके से फाइल रिपोर्ट लगा दी है। विवेचक की ओर से 27 जुलाई 2021 को फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है, जबकि 28 जुलाई को विवेचक और एसपी क्राइम ने शिक्षक की पत्नी प्रीति और केस के वादी किरणपाल सिंह को बयान दर्ज करने के लिए अपने दफ्तर में बुलाया था। उस वक्त दोनों को बताया गया था कि केस में स्पेशल टीम का गठन किया जा रहा है।
मानवाधिकार आयोग और न्यायालय की शरण में जाएगा परिवार
शिक्षक अशोक चौधरी के भाई हरिओम चौधरी का कहना है कि पुलिस ने इस केस में पहले ही दिन से लापरवाही बरती है। इसके पीछे पुलिस का क्या मकसद रहा है सब जानते हैं। पुलिस ने मेरे और मेरे परिवार के साथ धोखा किया है। विवेचक और अधिकारी हमसे कहते रहे कि केस की जांच जारी है। हमें बिना बनाए ही फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। अब मैं इस मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग और कोर्ट की शरण में जाऊंगा।
विवेचक ने एफआर में ये दिया तर्क
विवेचक ने एफआर में तर्क दिया है कि इस केस में पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। विवेचना के दौरान किसी अभियुक्त का नाम सामने नहीं आया है। आवेदक द्वारा लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं होते हैं। इस केस में कोई अन्य तथ्य सामने नहीं आया है। केस में आगे कोई विवेचना की जरूरत नहीं है।
एक साल में थाने से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक 74 प्रार्थना पत्र भेजे गए
मुरादाबाद। केस के वादी और अशोक चौधरी के चचेरे भाई किरण पाल सिंह ने बताया कि हत्याकांड से अब तक वह इस मामले में थानेदार से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक 74 प्रार्थना पत्र भेज चुके हैं। उन्होंने थानेदार, सीओ, एसएसपी, डीएम, डीआईजी, एडीजी, मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी कार्यालय, प्रमुख सचिव गृह और प्रधान मंत्री कार्यालय में प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई थी। मगर कहीं से भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। जिन लोगों के नाम बताए गए हैं। पुलिस ने केस में उनके नाम तक शामिल नहीं किए। खुलासे के लिए स्पेशल टीम का भी गठन नहीं किया गया।
चार विवेचक बदले, नतीजा सिफर रहा
मुरादाबाद। शिक्षक अशोक चौधरी हत्याकांड में चार विवेचक बदले गए। मगर नतीजा सिफर ही रहा। इस केस में सबसे पहले सब इंस्पेक्टर जितेंद्र बालियान। इसके बाद निरीक्षक एवं पाकबड़ा थाने की तत्कालीन प्रभारी रजनी द्विवेदी और क्राइम ब्रांच के निरीक्षक सतीश कुमार को विवेचना मिली। जबकि फाइनल रिपोर्ट क्राइम के निरीक्षक राज कुमार भारद्वाज द्वारा लगाई गई है।
तीन बार बदलीं गईं केस में धाराएं
मुरादाबाद। इस केस में तीन बार धाराएं बदलीं गई थीं। किरण पाल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने इस मामले में पाकबड़ा में आईपीसी की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) में केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने जांच के बाद धारा 307 (जानलेवा हमला) में तरमीम कर ली थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने केस में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) बढ़ा ली थी।