जिसे ढूंढ रहे हो वह तुम्हारे भीतर ही बैठा है
श्रीश्री ने कहा कि गौतम बुद्ध से लेकर आदि गुरु शंकराचार्य ने आत्म तत्व की खोज की। सबकी खोज का निष्कर्ष यही रहा कि आत्मा ही परमात्मा है। हम सब उसी का अंश हैं। जिसे हम ढूंढ रहे हैं, वह हमारे भीतर ही बैठा है। संवाद कार्यक्रम के बीच श्रीश्री ने सबको 25 मिनट तक ध्यान कराया।
कहा कि ओमकार शरीर को पवित्र कर देता है। मन विकसित होता है तो शरीर शांत हो जाता है। बाहर से मौन होते हुए भी अंदर से चेतन रहने की कला ही ध्यान है।
ध्यान से उग्रवादियों का भी मन हो सकता है परिवर्तित
श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि ध्यान व ज्ञान ही दो माध्यम हैं जिनसे बुरे से बुरे व्यक्ति का मन परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने अंगुलिमाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां कृपा होती है, वहां डाकू संत बन जाते हैं।
श्रीश्री ने कहा कि कश्मीर घाटी में तमाम युवाओं का मन आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से परिवर्तित हुआ है। संवाद में मनिका, विभा, महेश अग्रवाल आदि लोगों ने आध्यात्मिक गुरु से सवाल भी पूछे। उन्होंने उत्तर देकर लोगों की जिज्ञासा को शांत किया।
जीवन में पैशन होना जरूरी, पीतल कारोबार ही मुरादाबाद का पैशन
कार्यक्रम में मनिका ने श्रीश्री से प्रश्न किया कि क्या हम अपने कर्मों से अपने परिवार का भाग्य बदल सकते हैं। आध्यात्मिक गुरु ने उत्तर दिया कि बिल्कुल बदल सकते हैं, बस हमारे कर्मों में निरंतरता रहनी चाहिए। कर्म करने के लिए व्यक्ति के अंदर पैशन होना चाहिए।
जैसे मुरादाबाद का पैशन पीतल का कारोबार है, इसके कारण ही यह शहर विश्व में प्रसिद्ध है। पैशन को जिंदा रखना चाहिए, इसके बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।