सपा ने एक बार फिर संभल सीट से सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क को लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। डॉ. बर्क के नाम का एलान होते ही सांसद के धुर विरोधी और संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद ने इस पर तल्ख टिप्पणी की है।
मुरादाबाद मंडल की संभल लोकसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित कर सपा ने दूसरे दलों के साथ अपने दावेदारों को भी चौंका दिया है। वहीं पांच सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रियाअंतिम दौर में है। इसके साथ ही मंडल की बाकी सीटों पर सपा से दावेदारी पेश करने वालों में हलचल बढ़ गई है। दावेदार टिकट को लेकर जोड़तोड़ में नए सिरे से जुट गए हैं।
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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के साथ मैदान में उतरी थी। सपा के खाते में मंडल की मुरादाबाद, संभल और रामपुर लोकसभा सीट आई थी, जबकि बिजनौर, नगीना और अमरोहा से बसपा के प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। गठबंधन ने मंडल की सभी छह सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन में चल रही रस्साकसी के बीच सपा ने संभल लोकसभा सीट से सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। मंडल की लोकसभा सीटों पर डॉ. बर्क किसी भी दल से पहले उम्मीदवार हैं। इस घोषणा के साथ ही मंडल में सियासी हलचल बढ़ गई है।
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दूसरे दल में सपा प्रत्याशी को लेकर नफा नुकसान के आकलन में जुट गए हैं। दूसरी ओर मंडल की मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बिजनौर और नगीना लोकसभा सीट से सपा के टिकट के दावेदार के बीच प्रत्याशी बनने की होड़ में तेजी आ गई है। फिलहाल सपा के दावेदार अपने-अपने राजनीतिक संबंधों को भुनाने में लगे हैं। दिल्ली और लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं।
बर्क पर दांव से इकबाल के तीखे तेवर
सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क को सपा ने एक बार फिर संभल सीट से लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। सांसद के धुर विरोधी और संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद ने इस पर तल्ख टिप्पणी की है। विधायक इकबाल महमूद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अपने समर्थकों के साथ मंथन करेंगे। उसके बाद निर्णय करेंगे कि चुनाव में सपा प्रत्याशी को लड़ाना है या नहीं। विधायक भी संभल लोकसभा सीट से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने डॉ. बर्क को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
सांसद डॉ. बर्क और विधायक इकबाल महमूद एक ही पार्टी में होने के बाद भी धुर विरोधी हैं। दोनों परिवारों के बीच 57 साल से राजनीतिक रस्साकशी चल रही है। इसकी शुरुआत 1967 से हुई थी। इकबाल महमूद के पिता और दो बार के विधायक महमूद हसन खां के सामने 1967 में डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। इसके चलते महमूद हसन खां को हार का सामना करना पड़ा था और जनसंघ पार्टी के प्रत्याशी महेश कुमार विधायक बन गए थे।
भाजपा को हटाने के लिए वोट करेगी जनता: डॉ. बर्क
प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सांसद डॉ. बर्क ने कहा कि मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूं जो पार्टी के मुखिया ने पहली सूची में मेरा नाम शामिल किया है। मैं पहले भी बिना डरे, सभी की आवाज उठाता रहा हूं। इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और भाजपा को हटाने के लिए जनता वोट करेगी। भाजपा सरकार ने मुसलमानों के साथ यादव और जाटव समाज के लोगों के साथ जुल्म किया है। भाजपा ने सरकारी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया है। भाजपा सरकार ने लोकतंत्र को खत्म करने का काम किया है। अच्छे शासन के लिए इंडिया गठबंधन को मजबूत करना जनता की जिम्मेदारी है।
2002 में डॉ. बर्क पर भारी पड़े थे इकबाल
1999 हुए लोकसभा चुनाव में डॉ. बर्क को हार मिली तो 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में डाॅ. बर्क एकबार फिर इकबाल महमूद के सामने चुनावी मैदान में उतर पड़े। सपा ने संभल विधानसभा सीट से इकबाल महमूद को प्रत्याशी बनाया तो डाॅ. बर्क ने राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि, इस चुनाव में इकबाल महमूद भारी पड़े और डॉ. बर्क को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद डॉ. बर्क ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।
2009 में फिर आमने-सामने आए बर्क और महमूद
डॉ. बर्क 2004 में मुरादाबाद लोकसभा सीट से सांसद बने थे। वर्ष 2009 में परिसीमन हुआ तो सपा ने इकबाल महमूद को संभल लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बना दिया। डाॅ. बर्क बसपा में शामिल हो गए और संभल लोकसभा सीट से इकबाल महमूद के सामने दावा ठोंक दिया। इस चुनाव में डॉ. बर्क को जीत मिली थी। उस समय डाॅ. बर्क की दमदारी को सपा ने भी माना और 2014 में सपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, भाजपा प्रत्याशी से करीब पांच हजार मतों से डॉ. बर्क हार गए थे।
डॉ. बर्क मजबूत दावेदार
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के संभल लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाए जाने पर खुशी जाहिर की है। साथ ही मिठाई खिलाकर एक दूसरे को बधाई दी। पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि डाॅ. बर्क सपा के मजबूत दावेदार हैं। इसलिए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें प्रत्याशी बनाया है। अन्य दावेदार इतने मजबूत नहीं थे। पार्टी ने संभल की जनता की मंशा के अनुसार सही निर्णय लिया है।
पोते के विधायक बनने पर लगने लगी थीं टिकट कटने की अटकलें
2022 में कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने अपने पोते जियाउर्रहमान बर्क को सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया था। उस समय पार्टी ने हाजी रिजवान का टिकट काट दिया था। चुनाव में जियाउर्रहमान को जीत भी मिली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव में डाॅ. शफीकुर्रहमान बर्क को टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन अब इन चर्चाओं पर विराम लग गया।
डॉ. बर्क कब-कब लड़े लोकसभा चुनाव
- पहली बार सपा के टिकट पर 1996 में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से जीते।
- दूसरी बार सपा के टिकट पर 1998 में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से जीते।
- तीसरी बार सपा के टिकट पर 1999 में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हारे।
- चौथी बार सपा के टिकट पर 2004 में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से जीते।
- पांचवीं बार बसपा के टिकट पर 2009 में संभल लोकसभा क्षेत्र से जीते।
- छठी बार सपा के टिकट पर 2014 में संभल लोकसभा क्षेत्र से हारे।
- सातवीं बार सपा के टिकट पर 2019 में संभल लोकसभा क्षेत्र से जीते।
- आठवीं बार 2024 में सपा ने प्रत्याशी बनाया है।
डॉ. बर्क कब-कब लड़े विधानसभा चुनाव
1967 में पहली बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।
1969 में दूसरी बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।
1974 में तीसरी बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते।
1977 में चौथी बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते।
1980 में पांचवीं बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।
1985 में छठी बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते।
1989 में सातवीं बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते।
1991 में आठवीं बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।
1993 में नौवीं बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।
2002 में दसवीं बार संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।