सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि चुनाव नजदीक है। लिहाजा हर राजनेता में होड़ लगी है कि कौन बड़ा हिंदू है। अगर कोई इस्लामिक मुल्क अपने यहां के नोटों पर देवी देवताओं की तस्वीर छाप रहा है तो वह भारत का आइडियल नहीं है, जिसे हम फॉलो करें। वह गुजरात में केजरीवाल द्वारा नोट पर गांधी जी के चित्र पर गणेश-लक्ष्मी की तस्वीर छापने के संबंध में दिए गए बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।
सांसद ने कहा कि भारत सर्वधर्म संभाव का देश है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक आस्था से जुड़े बयान देने का प्रचलन बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव हैं। इसलिए हर नेता खुद को सबसे बड़ा हिंदुत्ववादी साबित करने में जुटा हुआ है। नोटों पर देवी-देवताओं की फोटो छापने से उनकी बेअदबी का अंदेशा रहेगा। इसके अलावा लोगों को माहौल खराब करने का मौका भी मिल जाएगा। इससे हमारे भाईयों की आस्था को ठेस पहुंचेगा। विश्व के अधिकांश मुल्क की करेंसी पर देवी देवताओं का चित्र नहीं है। अगर किसी एक-दो मुल्क ने अपने यहां के नोट पर देवी देवता का चित्र छापा
है तो वह हमारे आदर्श नहीं हैं।
उन्होंने राजनेताओं को सलाह दी कि अगर सियासत के लिए मुद्दा बनाना है तो आस्था के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसान-मजदूरों की बदहाली, स्वास्थ्य और शिक्षा को मुद्दा बनाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सारे सियासी लोग हिंदुत्व का नारियल मुसलमान की खोपड़ी पर फोड़ना चाहते हैं जो गलत ट्रेंड है।