घटना वाले दिन चंदौसी सेशन हवालात पर तैनात रहे पुलिस कर्मियों पर जल्द गाज गिर सकती है। अभी तक की पड़ताल में यह बात साफ हो चुकी है के बंदियों को हथियार पेशी के दौरान चंदौसी कचहरी परिसर या सेशन हवालात पर ही दिए गए। ऐसे में उन पुलिस कर्मियों पर शिकंजा कस गया है जिनकी ड्यूटी सेशन हवालात पर थी। इन पुलिस कर्मियों से सख्ती से पूछताछ की जा रही है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि पेशी के दौरान फरार बंदियों के संपर्क में कौन- कौन आया था।
दो पुलिस कर्मियों की शहादत के लिए कुछ पुलिस वालों की ही लापरवाही जिम्मेदार है। बंदियों तक यदि हथियार नहीं पहुंचते तो वह दो सिपाहियों की हत्या कर फरार नहीं हो सकते थे। लेकिन सुरक्षा इंतजामों और चौकसी को भेदकर बंदियों के साथियों या परिवार के लोगों ने उन तक पुलिस कस्टडी में हथियार पहुंचा दिए।
कोर्ट परिसर पर बने सेशन हवालात पर तैनात पुलिस कर्मियों की यह जिम्मेदारी थी कि वह बंदियों की निगरानी करते। नियम तो यह भी है कि सेशन हवालात पर बंदियों को उनके परिजनों या किसी से भी मिलने नहीं दिया जाएगा और किसी भी तरह का सामन बंदियों को नहीं लेने दिया जाएगा। सेशन हवालात से बंदियों को जब कोर्ट में पेशी पर ले जाया और वापस लाया जाता है तो दो पुलिस कर्मी साथ में रहते हैं।
बंदियों को हथियार या तो सेशन हवालात पर दिए गए या फिर कोर्ट में पेशी से लौटते समय सेशन हवालात तक के रास्ते में कहीं दिए गए। दोनों ही हालात में सेशन हवालात पर लगे पुलिस कर्मियों की लापरवाही सामने आ रही है। आईजी रमित शर्मा का कहना है कि सेशन हवालात पर जो पुलिस कर्मी से उनसे पूछताछ करके यह जानने की कोशिश की जा रही है कि बंदियों के संपर्क में उस दिन कौन - कौन आया था।