उसके परिवार में पत्नी वर्षा, दो बेटी राधिका और डिंपल हैं। जबकि शिवम उसका साला है। शिवम के पिता राजेंद्र की तबीयत खराब है। उनका रामपुर के देसी दवाखाने से इलाज चल रहा है। शिवम को रामपुर से दवा लेकर आनी थी। शिवम के साथ रमेश और सूरज भी आ गए थे। तीनों लोग प्रेमनगर में रहने वाले अपने रिश्तेदार सूरज के यहां रुक गए। सूरज मधुबनी तिराहे पर नारियल पानी का ठेला लगाता है।
तीनों लोग उसके साथ मधुबनी तिहारो पर चले गए। अन्य रिश्तेदार जतिन भी इनके पास आ गया। दोपहर दो बजे तक सभी लोग यहां रुके थे। इसके बाद सभी ने भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए नहाने का प्लान बनाया। वह सभी लोग स्वीमिंग पूल और ट्यूबवेल की तलाश करने में लग गए, लेकिन न स्वीमिंग पूल मिला और न ही ट्यूबवेल मिल पाया। इसके बाद उन्होंने नदी में नहाने का प्लान बना लिया था।
इसके बाद पोस्टमार्टम हाउस के सामने रामगंगा नदी के घाट पर पहुंच गए। यहां पहले से एक व्यक्ति जेसीबी से रेत उठा रहा था। उसने युवकों से गहरा गड्ढा होने की बात कहकर नहाने के लिए मना किया। प्रेमनगर निवासी सूरज और जतिन उससे बात करने लगे, लेकिन इसी दौरान दिल्ली निवासी सूरज व रमेश और शिवम नदी में कूद गए।
शिवम तो घाट के पास रह गया, जबकि वह दोनों आगे पानी में निकल गए। शिवम के गले तक पानी आया तो उसने शोर मचा दिया। जेसीबी की मदद से शिवम को तो बचा लिया गया, लेकिन सूरज और रमेश डूब गए। गोताखोरों ने एक घंटे के बाद सूरज का शव और ढाई घंटे के बाद रमेश का शव पानी से बाहर निकाला।
सोमवार सुबह दिल्ली से आए थे रिश्तेदार सूरज और रमेश
रमेश सोमवार सुबह अपने रिश्तेदार सूरज से मिलने के लिए प्रेमनगर आया था। तब रमेश के साथ उसका साला शिवम और एक अन्य रिश्तेदार सूरज भी आए थे। सोमवार की शाम सभी पोस्टमार्टम हाउस के सामने नहाने के लिए चले गए थे। नहाते समय गड्ढे में भरे गहरे पानी में चले गए। डूबने से रिश्तेदार रमेश और सूरज की मौत हो गई।
खनन करने वालों ने बनाए हैं गहरे गड्ढे
जिस जगह पांचों नहा रहे थे, वहां खनन करने वालों ने गहरे गड्ढे बना दिए हैं। उसमें पानी भरा हुआ है। रमेश और सूरज दिल्ली के रहने वाले थे। जिस कारण उन्हें गहराई का अंदाजा नहीं था। पांचों उसमें नहाने के लिए उतर गए थे।