मुरादाबाद। पौने दो बजे का वक्त था। मूंढापांडे टोल के पास दिल्ली जा रही हरियाणा रोडवेज की बस पौने दो घंटे से जाम में फंसी थी। चिलचिलाती धूप निकली थी और बस भी बुरी तरह तप रही थी। गर्मी और उमस की वजह से यात्रियों का बुरा हाल था। इसमें सवार मासूम बच्चे बुरी तरह बिलख रहे थे। परिजन अपने रुमाल से हवा करके बच्चों को कुछ राहत देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भूख उन्हें शांत नहीं होने दे रही थी।
माता-पिता घर से जो दूध, बिस्कुट लेकर चले थे वह खत्म हो गए थे, आसपास भी कोई दूध की दुकान नहीं थी ऐसे में बच्चे भूख की वजह से परेशान थे। कुछ दूरी पर जरूर दूध उपलब्ध था लेकिन जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, डर था कि हीं बस चल ना पड़े। लखनऊ से मेरठ जा रहे दीपक और शिखा का कुछ यही हाल था।
आठ महीने का मासूम देव भूख से रो रहा था। शिखा उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी। दीपक भारी मन से देव को चुप कराने की कोशिश कर रहे थे। गर्मी से बेहाल बच्चे बार-बार खिड़की से सिर निकालकर देख रहे थे कि पता नहीं कब जाम खुलेगा ओर वे यहां से निकलेंगे।
रामपुर के अस्पताल में अपने बीमार चाचा को देखकर लौट रहे सलमान उनकी पत्नी नाजिया और दो बच्चे बस में बैठे जाम खुलने का इंतजार कर रहे थे। दोनों बच्चे गर्मी से परेशान थे ओर रो रहे थे, कभी बोतल से पानी पिलाते तो कभी रुमाल से हवा करते।
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