मुरादाबाद। मालगाड़ी डीरेलमेंट मामले में रेलवे मुख्यालय की टीम जांच पूरी कर बड़ौदा हाउस लौट गई है। चार दिन चली कार्रवाई में 12 लोगों के बयान दर्ज किए गए। दो बार घटनास्थल का मुआयना किया गया और क्षतिग्रस्त वैगन को भी परखा गया। वैगन का टूटा हुआ पहिया भी जांच के लिए भेजा गया है। अब रिपोर्ट का इंतजार है, इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि किसकी खामी के चलते डीरेलमेंट हुआ।
एक जुलाई की रात 09:35 बजे हादसे की सूचना के बाद रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। तीन जुलाई को रामपुर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने पटरियों के बोल्ट खुले मिलने में आपराधिक साजिश की रिपोर्ट दर्ज कराई। जीआरपी की जांच के मुताबिक बोल्ट खुलने में आपराधिक साजिश नहीं थी। डीरेलमेंट से पहले दोपहर में घटनास्थल के पास ट्रैक मेंटिनेंस का काम हुआ। इस आधार पर और घटना के दो दिन बाद मुकदमा दर्ज कराने पर शक की सुईं इंजीनियरिंग विभाग की ओर घूमी। मामले में कैरिज एंड वैगन विभाग के कर्मियों, शहजादनगर, घमौरा स्टेशन मास्टर, मालगाड़ी के लोकोपायलट, गार्ड आदि के बयान भी दर्ज किए गए। सूत्रों के मुताबिक बयान में सब ने पहिये में हॉट एक्सेल की जानकारी न होना बताया है। डीआरएम अजय नंदन का कहना है कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। कुछ चीजें रह गई हैं, जिनके सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।