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प्रदूषण और तापमान का अंतर बढ़ा रहा गले और सीने में दर्द

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मुरादाबाद। मौसम में तेजी के साथ बदलाव हो रहा है। शाम होते ही सर्द हवा चलने लगती है। इसकी वजह से अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान में 13 डिग्री सेल्सियस का अंतर है। इसके अलावा वायु प्रदूषण भी मानक से अधिक है। इसकी वजह से शहरवासियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। प्रतिदिन करीब 500 मरीज गले में संक्रमण, जुकाम और बुखार के जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हार्टअटैक और उच्च रक्तचाप की समस्या भी बढ़ रही है।
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बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, शाम छह बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 रहा। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो मानक से करीब 16 गुणा अधिक है। पीएम 10 का अधिकतम स्तर 467 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में 1200 मरीज उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। इसमें बुखार, जुकाम, गले में दर्द और खराश के मरीज 500 होते हैं। बच्चे भी इस समस्या से पीड़ित हैं। 150 की ओपीडी में करीब 70 बच्चे प्रतिदिन इन्हीं बीमारियों का उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं। बदलते मौसम और प्रदूषण से बच्चे और बुजुर्गों को बचाना बहुत जरूरी है।
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इनका करें पालन
- सुबह शाम प्रदूषण और ठंड से बचने के लिए टहलने से करें परहेज
- ठंड में जब भी निकलें गर्म कपड़े जरूर पहनें।
- फ्रिज का ठंडा पानी न पीएं, गुनगुना पानी पीएं। फ्रिज में रखा खाना गर्म करके खाएं।
- आहार में फलों और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके।
- रक्तचाप और हृदय रोगियों को चिकित्सकों को दिखाकर दवा की मात्रा बढ़वा लेनी चाहिए।
- बुजुर्ग, हृदय रोगी, दमा के मरीज और किडनी रोगियों को निमोनिया से बचने के लिए वैक्सीन न्यूमोकोकल लगवा लें।
आंखों में खुजली, हार्टअटैक, हाईब्लड प्रेशर आदि के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ठंड की वजह से बहुत से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। तबीयत खराब होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और सर्दी व प्रदूषण से बचकर रहें।
डॉ. पीके शुक्ला, फिजिशियन।
ठंड शुरू होती है तो फेफड़े, श्वांस नली और गला खराब होने की आशंका बढ़ जाती है, क्योंकि खांसी, जुकाम, खराश, दमा और निमोनिया बढ़ता है। सर्दी के कारण खून की नलियां सिकुड़ती हैं, तो रक्तचाप बढ़ता है। इससे हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। मरीजों की संख्या डेढ़ गुणा हो गई है। पहले ओपीडी में इन परेशानियों के 10 मरीज आते थे, अब 15 आ रहे हैं। इसका एक कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण भी है। श्वांस के मरीज, बुजुर्ग और बच्चों को सुबह के समय घूमने से परहेज करना चाहिए।
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डॉ. जेपी चंदेल, फिजिशियन
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