सपा सांसद डॉ. एसटी हसन का टिकट कटने के बाद मुरादाबाद में खींचतान जारी है। इसकी सियासी तपिश हैदराबाद तक पहुंच गई है। सपा में टिकट को लेकर चल रहे उठापठक पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में जुमे की नमाज के बाद कहा कि खुदा एसटी हसन की लाज रख ले। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दूसरे दिन बुधवार दोपहर बिजनौर की पूर्व विधायक रुचि वीरा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से जारी पार्टी का सिंबल और एसटी हसन के सिंबल निरस्तीकरण का पत्र लेकर कलक्ट्रेट पहुंच गईं। साथ ही नामांकन करके सभी को चौंका दिया था। इसके बाद सपा में मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक हलचल मच गई।
टिकट कटने से आहत सांसद डॉ. एसटी हसन ने अपने बयान में मुरादाबाद में पार्टी का प्रचार नहीं करने तक की बात कह डाली। इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके जरिये वह सपा पर तंज कस रहे हैं। फिलहाल ओवैसी मुरादाबाद की सियासत में चर्चाओं मेंं बने हुए हैं।
ओवैसी ने कहा था फॉर्म-बी नहीं देंगे अखिलेश
टिकट कटने के बाद सांसद डॉ. एसटी हसन ने ओवैसी की बात का हवाला दिया था। कहा था कि असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में कहा था कि हसन साहब आपको अखिलेश फॉर्म बी नहीं देंगे। वह मुस्लिम लीडरशिप को खत्म करना चाहते हैं। वह बात सच साबित हो गई। उस समय हंसी मजाक समझकर ओवैसी की बात टाल गए थे।
सांसद बोले- ओवैसी को शुक्रिया, सपा प्रत्याशी से मिलना नहीं चाहते
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि उन्हें ओवैसी की तकरीर के बारे में पता नहीं है लेकिन ऐसा किया है तो ओवैसी को शुक्रिया कहूंगा। दिल्ली में रहते हुए ओवैसी से बातचीत होती रहती थी।
सपा प्रत्याशी के मिलने या संपर्क करने के सवाल पर कहा कि मुझसे सपा प्रत्याशी रुचि वीरा ने संपर्क नहीं किया है। वह सपा प्रत्याशी से मिलना भी नहीं चाहते हैं। उनसे मिलने पर मेरे समर्थकों का दिल टूट जाएगा। अपनों की तकलीफों का उन्हें अहसास है। समर्थक टिकट कटने के कारण आहत हैं।
मुख्तार अंसारी की मौत की जांच करें सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज: डॉ. एसटी हसन
माफिया एवं पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की मौत के मामले को लेकर सांसद डॉ. एसटी हसन ने सवाल उठाया है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से मौत की जांच सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौत प्राकृतिक हुई या अन्य कारणों से हुई है, इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
उनके परिजन काफी दिनों से शक जाहिर कर रहे थे कि मुख्तार को जेल के अंदर जहर देकर मार दिया जाएगा। इस बीच अचानक तबीयत खराब होना और मौत होने से सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की जांच कराना कोर्ट का विषय था।
इस मामले में रिटायर्ड जज नहीं, सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच होनी चाहिए। इसके बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा। पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित किए गए विसरा की जांच देश के बड़े सरकारी और प्राइवेट दोनों प्रकार की लैब से होनी चाहिए। ये लैब प्रदेश के बाहर की होनी चाहिए। इससे साफ हो जाएगा कि उनको जहर दिया गया था या नहीं।