मुरादाबाद। मंडल में ड्रग निरीक्षकों की टीमों ने एक वर्ष में 830 मेडिकल स्टोरों की जांच कर 1066 दवाओं के सैंपल लिए। लैब से मिली जांच रिपोर्ट में दवाओं के 50 से अधिक सैंपल फेल हो गए, जो कुल सैंपल के करीब पांच प्रतिशत हैं। रिपोर्ट के आधार पर जांच अधिकारियों ने 104 मुकदमे दर्ज कराए।
औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक मंडल में मुरादाबाद जिले के 225 मेडिकल स्टोरों के दवाओं की जांच की गई। इस बीच 219 दवाओं के सैंपल लेने के बाद 20 लाख की दवाएं जब्त की गईं। लैब से रिपोर्ट आने पर 18 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। इस मामले में 22 मेडिकल स्टोरों के खिलाफ अदालत में वाद दायर किए गए।
इसी प्रकार अमरोहा जिले में 141 मेडिकल स्टोरों की जांच कर 214 दवाओं के सैंपल लिए गए। इनमें आठ दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। साथ ही 18 मुकदमे अदालत में दायर किए गए। रामपुर, बिजनाैर व अमरोहा में लिए गए दवाओं के सैंपलों में से 27 सैंपल फेल हो गए। मंडल में कुल 38.72 लाख की दवाएं जब्त की गईं।
मुरादाबाद में सबसे अधिक 18 सैंपल हुए फेल
ड्रग निरीक्षक उर्मिला वर्मा ने बताया कि जिले में 18 सैंपल फेल पाए गए। लैब से कुछ रिपोर्ट बाद में आई थीं। इनमें 15 अधोमानक, एक नकली दवा और दो मिथ्याछाप रिपोर्ट शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश में निर्मित 12 दवाएं अधोमानक पाई गईं। एक दवा नकली पाई गई। दो उत्तराखंड, एक मध्य प्रदेश की दवा जांच में फेल हो गई।
पांच मेडिकल स्टोरों पर छापा, 16 दवाओं के लिए सैंपल
मुरादाबाद। मंडलायुक्त के निर्देश पर जिले की टीम ने शहर के पांच मेडिकल स्टोरों में छापा मारकर 16 दवाओं के सैंपल लिए। इस दौरान विक्रेताओं को ब्रांडेड दवाएं बेचने की हिदायत दी गई।
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह को गोपनीय सूचना मिली कि शहर में कुछ मेडिकल स्टोर संचालक अधोमानक दवाएं बेच रहे हैं। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए। इस मामले में ड्रग निरीक्षक उर्मिला वर्मा की टीम ने शहर के न्यू मार्केट स्टेशन रोड के चार और कंजरी सराय के एक मेडिकल स्टोर की जांच के बाद 16 दवाओं के सैंपल लिए। सभी सैंपलों को जांच के लिए लखनऊ स्थित लैब में भेजा गया गया है।
जांच में तेजी लाने का चल रहा प्रयास
मंडल के प्रभारी अधिकारी एवं अपर आयुक्त औषधि प्रशासन अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि वह मेरठ मंडल के साथ मुरादाबाद मंडल में तीन दिन बैठते हैं। मुरादाबाद मंडल में जांच कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। कुछ परिणाम भी सकारात्मक आए हैं। लैब से आई रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद वाद दायर किए गए हैं।