मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में तीन विभागों की निष्क्रियता के कारण शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना नए वर्ष के शुरूआती महीनों में भी पूरी नहीं हो सकेगी। तय समय पर शासन से न इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई न ही काम पूरा होने से यात्रियों को उम्मीदों को झटका लगा है। कई महीनों से चार्जिंग डिपो पर काम अधूरा है। साल के अंत में भी डिपो पर चार्जिंग पैनल नहीं लगे हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था भी नहीं हो सकी है।
साढ़े पांच करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाले चार्जिंग डिपो के वर्ष 2021 में शुरू होना था। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर और सिस्टम की सुस्ती के चलते यह पूरा नहीं हो पाया है। परिवहन निगम और नगर निगम के अधिकारी एक दूसरे पर देरी की जिम्मेदारी थोप रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग डिपो पर नगर निगम, परिवहन निगम और विद्युत निगम काम साझा कर रहे हैं। साथ ही जिला प्रशासन की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण है। फिलहाल ढांचागत निर्माण का काम ही अधूरा है। विद्युत निगम ने भी डिपो के विद्युतीकरण का काम अंतिम चरण में होने का का दावा किया है। वर्तमान स्थिति में नगर निगम द्वारा बनाए जाने वाले चार्गिंग प्वाइंट अभी तैयार नहीं है। साथ ही बसों के रूट मैप के लिए सर्वे होना बाकी है। इसके अलावा शहर में हर पांच किमी के दायरे में एक चार्जिंग प्वाइंट लगाने की योजना है। इसके लिए भी सर्वे होना बाकी है।
इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण काम इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से इलेक्ट्रिक बसें भेजने की प्रक्रिया लंबित है। चुनाव से पहले इसके पूरा होने की संभावना है। वहीं, प्रोजेक्ट के मुताबिक 25 बसें शहर में चलाई जाएंगी। इनमें कार्य करने वाला स्टाफ और ईटीएम की व्यवस्था निजी कंपनी करेगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी टीएन मिश्रा का कहना है कि नगर निगम अपना अधिकांश कार्य पूरा कर चुका है। मात्र 10 फीसदी काम शेष है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी का कहना है कि उन्हें सिर्फ मैनेजमेंट से संबंधित कार्य देखना है, बसों की प्रक्रिया शासन स्तर लंबित है। बहरहाल मौजूदा स्थिति के अनुसार फरवरी 2022 के अंत तक भी शहर में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू नहीं हो सकेगा।