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अब आशा, आंगनबाड़ी वर्कर भी करेंगी हैंडपंप के पानी की जांच

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मुरादाबाद। अब गांवों में काम करने वाली आंगनबाड़ी और आशा वर्करों भी हैंडपंप के पानी की जांच करेंगी। इसके लिए जल निगम उन्हें प्रशिक्षण देगा, जांच किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। एक ग्राम पंचायत में पांच वर्कर काम करेंगे। जल निगम ने ब्लॉक कार्यालयों से इनके नाम की सूची मांगी है।
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गांवों की पेयजल आपूर्ति अधिकांशत: हैंडपंप पर निर्भर है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 28 हजार से अधिक हैंडपंप लगे हैं। अधिकांशत: हैंडपंप लगाते वक्त उसके पानी की जांच होती है, लेकिन उसके बाद वो हैंडपंप कैसा पानी दे रहा है। इस तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में इन हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता को लेकर संशय बना रहता है। इसी को देखते हुए अब गांवों में लगे हैंडपंपों की नियमित जांच के लिए गांवों में काम करने वाली आशा और आंगनबाड़ी वर्करों को भी पानी की जांच करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत से पांच-पांच वर्क रों का चयन किया जाएगा। इनमें ऐसे वर्कर को प्रमुखता दी जाएगी जो एंड्राइड मोबाइल आदि अच्छी तरह चलाना जानती हैं और थोड़ा पढ़ी लिखी भी हों। इसके बाद जल निगम उन्हें जांच करने के लिए आवश्यकता केमिकल आदि सामान की किट उपलब्ध कराएगा।
उन्हें पानी के विभिन्न तत्वों की जांच करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह लिया जाएगा पानी का नमूना जिस हैंडपंप का नमूना लिया जाना है उसकी जानकारी जलनिगम द्वारा दी जाएगी। इसके बाद ये वर्कर उस हैंडपंप के आसपास रहने वाले एक-दो व्यक्तियों को बुलाकर उनके समक्ष ही हैंडपंप से पानी लेकर उसकी जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट जलनिगम की स्थानीय लैब को भेजी जाएगी। जिसे उनके द्वारा पोर्टल पर चढ़ा दी जाएगी। लैब के अधिकारी चाहें तो किसी भी गांव के हैंडपंप के नमूने की फिर से जांच कर सकते हैं। यदि जांच रिपोर्ट में हैंडपंप का पानी दूषित मिलता है गांव में उस हैंडपंप के आसपास रहने वाले लोगों को इसके बारे में बता दिया जाएगा ताकि वह उसका पानी न पिएं।
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चार गांवों के हैंडपंप का पानी मिला था दूषित
पिछले दिनों जल निगम द्वारा कराई गई जांच में असालतनगर बधा, ताजपुर माफी, महलकपुर निजामपुर और काफियाबाद गांव के चार हैंडपंपों का पानी दूषित मिला था। इनमें मिट्टी के कण मिले थे। जिसके बाद इन हैंडपंप के पानी पीने पर रोक लगा दी गई थी। पानी के इन तत्वों की होगी जांच टर्बिडिटी, टीडीएस, पीएच, कठोरता, क्लोराइड, फ्लोराइड, गंध और तीव्रता।
एक ग्राम पंचायत से पांच वर्करों को किट और प्रशिक्षण दिया जाएगा। संबंधित विभागों से वर्करों के नाम मांगे गए हैं। सभी जगहों से नाम आने के बाद किट वितरण और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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राजीव कुमार, जेई जल निगम प्रयोगशाला प्रभारी
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