प्रदेश की 31 चीनी मिलों पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं। 70 लोग नामजद हैं। चार चीनी मिलों के खिलाफ शुक्रवार को केस करा दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इनके खिलाफ वाकई कोई कार्रवाई की जाएगी या फिर वैसा ही मुकदमा हुआ है जैसे प्रदेश की 31 मिलों पर पहले हो चुका है।
प्रदेश में 116 चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद की गई है। अब तो पेराई सत्र भी खत्म हो गया है लेकिन शुगर लॉबी ने भुगतान नहीं किया है। 3 हजार 500 करोड़ दबाए बैठी हैं चीनी मिलें। ऐसा भी नहीं है कि शासन से सख्ती न की जा रही हो। मुकदमे तक लिखे जा रहे हैं। प्रदेश में इस पेराई सत्र में पेमेंट न करने पर 36 मिलों पर केस हो चुका है।
लेकिन मजे की बात देखिए कि पकड़ा किसी को नहीं गया। गिरफ्तारी तो बहुत दूर की बात है दबिश तक नहीं गई। अब फिर चार मिलों पर मुकदमा दर्ज करा दिया है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह बनता है कि जब पहले ही कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अब क्या होगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि शासन मिलों पर मुकदमे दर्ज कराकर किसानों को सख्ती का संदेश देना चाहता हो।
यह सरकार की कोरी नाटकबाजी है: वीएम सिंह
किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह का कहना है कि यह सरकार की नाटकबाजी है। अगर रिपोर्ट लिखा रहे हैं तो गिरफ्तार भी तो कराइए। छापे पड़वाइए। चीनी जब्त करो। एक दो को पकड़कर सरकार जेल भेज दे तो सब सुधर जाएंगे।